...तो केरल के लिए वरदान साबित होगा 'रूपये का अवमूल्यन'

इरूदय का कहना है कि 2011 में किये गये सर्वेक्षण के मुताबिक लगभग 20 लाख मलयाली प्रवासियों से राज्य को 60 हजार करोड़ रूपये मिले थे लेकिन अब रूपये की वैल्यू डॉलर के मुकाबले 67 के पार चली गयी है, अत: अप्रैल 2014 की प्रारंभिक रिपोर्ट के आने तक हमें अनुमान है कि यह आंकड़ा 75000 तक पहुंच जाएगा।
इरूदय ने बताया कि हमने पहला केरल माइग्रेशन सर्वे 1998 में किया, हमारी योजना हर पांच साल में इसे करने की थी लेकिन हमने यह 2007 में आर्थिक मंदी का प्रभाव जानने के लिए और दूसरी बार 2011 में किये थे। वहीं अगले महीने प्रारम्भ होने वाले सर्वे की रिपोर्ट अप्रैल 2014 में आएगी, जिसमें रेमीटेंस के 75 हजार तक पहुंचने के आसार हैं।
राज्य की जीडीपी का 35 फीसदी होगा धन
बताया जाता है कि सितंबर में ओनम और दिसंबर में क्रिसमस त्यौहार होने के कारण केरल के लोग सर्वाधिक धन अपने परिजनों को भेजते हैं। इस समय राज्य को जो धन रेमीटेंस के रूप में प्राप्त हो रहा है वह जीडीपी का 31.23 फीसदी है लेकिन अगर यह 75 हजार करोड़ हो जाएगा तो जीडीपी का 35 फीसदी होगा। केरल और कर्नाटक के ज्यादातर लोग खाड़ी देशों में धन अर्जित करने के लिए जाते हैं।












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