मुस्लिम नेताओं के दबाव में है उप्र सरकार : राम माधव

उत्तर प्रदेश की प्रयाग नगरी इलाहाबाद में रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित एक समारोह में राम माधव ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, "अच्छा होगा कि संतों की भावनाओं को कुचलने के बजाय सरकार अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे। संतों के निर्णय के आधार पर हम चौरासी कोसी परिक्रमा जारी रखेंगे। सरकार का सिर्फ इतना दायित्व बनता है कि वह इस यात्रा को सही प्रकार से संपन्न कराए।"
माधव ने कहा, "समाज को तय करना होगा कि हमें संतों व महात्माओं के पीछे खड़ा होना है या जो अल्पकाल के लिए सत्ता की कुर्सी पर बैठने के लालच में देश व समाज को तोड़ते हैं, उनके पीछे।" केंद्र सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार देश की आर्थिक स्थिति इतनी नाजुक हुई है। देश की अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से चौपट हो गई है। वहीं देश की सुरक्षा भी खतरे में हैं, पाकिस्तान एक तरफ हमारे सैनिकों पर हमला करता है तो दूसरी तरफ चीन भारत की सीमाओं में घुसपैठ करता है। सरकार बेबस नजर आती है। अत: अब देश को नया नेतृत्व देने का वक्त आ गया है।
मोदी का नाम लिए बगैर उनके नेतृत्व में अगली सरकार बनाने की ओर इशारा करते हुए माधव ने कहा कि देश के सामने कमजोर नेतृत्व को बदलने का विकल्प भी तैयार है। अब आवश्यकता है कि सभी लोग उस दिशा में प्रयास करें। उत्तर प्रदेश सरकार ने आज प्रदेश की 85 विभागीय योजनाओं में 20 फीसदी कोटा अल्पसंख्यकों के लिए भी निर्धारित कर दिया है, जिसके बारे में प्रदेश सरकार का कहना है कि वह अल्पसंख्यकों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए ऐसा कर रही है।












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