तीज पर सज गई मेंहदी, लगे झूले, साथ में घेवर की धूम
मथुरा/आगरा। ब्रज के हलवाईयों की मानें तो इस बार तीज के पर्व (शुक्रवार, नौ अगस्त) पर घेवर की धूम होगी। मधुमखी के छत्ते जैसी दिखने वाली मिठाई घेवर की बढ़ती मांग ने आगरा और मथुरा में पेठे और पेड़े की मिठास और लोकप्रियता तक को पीछे छोड़ दिया है।
घेवर मैदे से बनी गोलाकर चपटी मिठाई है, जिसे सांचों में डालकर पहले तेल में हल्का तला जाता है, फिर चीनी की चाशनी में डुबोकर निकाला जाता है और फिर रबड़ी और सूखे मेवों से सजाया जाता है। घेवर की खासियत है कि यह मानसून के मौसम में ही ज्यादा बनता है और ब्रजमंडल की सभी मिठाई की दुकानों में उपलब्ध होता है।
भगत स्वीट्स के मालिक शिशिर भगत ने बताया, "घेवर का स्वाद इसे बनाने और तैयार करने की कला और गुणवत्ता पर निर्भर करता है। शुद्ध घी में बने घेवर का स्वाद सबसे उम्दा और अलग होता है पर यह ज्यादा महंगा होता है।" घेवर मूल रूप से राजस्थान की मिठाई है, जहां तीज का त्योहार काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। राजस्थान में घेवर कई रंगों और रूपों जैसे सादा, मावा, मलाई में उपलब्ध होता है।

दूध में डूबोकर फालूदा
लोग इसे गर्म दूध में डूबोकर फालूदा की तरह खाते हैं। अब आगरा में भी यह प्रचलन देखने को मिलता है।

आगरा की प्रसिद्ध मिठाई
रिवाइवल हेल्थ प्रोग्राम की नींव रखने वाले डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा कहते हैं, "आजकल लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों और मधुमेह के बढ़ते मामलों के बावजूद आगरा की प्रसिद्ध मिठाईयों की मांग में कमी नहीं आई है।"

घेवर संदेश लेकर मायके
भगत ने बताया कि ब्रज मंडल में रक्षा बंधन के त्योहार के दौरान नवविवाहित महिलाएं अपने पति के साथ घेवर संदेश लेकर मायके वालों से मिलने जाती हैं।

इसे 'सालूनउ' का त्योहार भी कहते हैं
ब्रज मंडल में इसे 'सालूनउ' का त्योहार भी कहते हैं। राजस्थान में इन दिनों मैदे से बनी फेनी की भी धूम होती है।

तीज की रौनक
उत्तर भारत में तीज की सबसे ज्यादा रौनक उत्तर प्रदेश में होती है।









Click it and Unblock the Notifications