एनडीए में न चली जाएं मायावती, इसलिए दी राहत!

[नवीन निगम] कांग्रेस वादा खिलाफ पार्टी नहीं हैं। यह उसने साबित कर दिया। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को आय से अधिक संपत्ति के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई। मुलायम भी थोड़े दिनों पहले सीबीआई की मेहरबानी से छूट ही जाते यदि मीडिया में खबर लीक न हो जाती। वो भी शायद कांग्रेस ने ही लीक कराई थी और उसी बहाने से मुलायम को राहत नहीं पहुंचाई। दरअसल कांग्रेस को डर था कि यदि उसने मायावती को पूर्ण राहत नहीं दिलाई तो चुनाव के बाद मायावती इसी मजबूरी के तहत एनडीए सरकार को समर्थन दे सकती हैं।

मुलायम के मामले में राहत इस नहीं दिलाई जा रही हैं। जिससे एनडीए सरकार यदि बनती है तो मुलायम मुस्लिम वोट के चक्कर में एनडीए के साथ जाएंगे नहीं, लेकिन केस के डर के चलते वह बार-बार एनडीए के सामने झुकेंगे और कांग्रेस उनकी इस बात को मुस्लिम वोट में उजागर करेंगी और इसी डर से मुलायम यूपीए के साथ रहेंगे या कांग्रेस समर्थन से किसी सरकार का निर्माण कराएंगे।

Mayawati

कांग्रेस को पता है कि मायावती के लिए यह कमजोर नस हैं, अब मायावती ने कभी कांग्रेस का विरोध नहीं किया हमेशा उसे हर फ्लोर पर समर्थन दिया। दरअसल मायावती को क्लीन चिट देकर कांग्रेस सपा को चिढ़ाना भी चाहती थी, कि हमारा खुलकर समर्थन करने वाला ही हमसे कुछ पा सकता हैं। इससे एक बात और साफ हो गई कि कांग्रेस उप्र में अपने लिए मुख्य बाधा बसपा को न मानकर सपा को मानती हैं और वह जानती है कि सपा को दबाने के लिए मुलायम की कमजोर नस को दाबे रखना जरुरी हैं। इसी सोच से उसने मायावती को राहत दिलवाई हैं।

उधर भाजपा ने ने कहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो की कमजोरियों की वजह से ही मायावती को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सीबीआई केंद्र सरकार के तोते की तरह है, यह बात एक बार फिर साबित हो गई है। केंद्र सरकार के दबाव में ही सीबीआई ने सही तरीके से मायावती के मामले को अदालत के समक्ष नहीं रखा। तथ्यों के अभाव में अदालत ने मायावती को राहत दी है।

उन्होंने कहा कि सीबीआई ने वही किया, जो केंद्र सरकार चाहती थी। उसकी कमजोर दलीलों और साक्ष्यों की वजह से ही बीएसपी की मुखिया को राहत मिली है। वाजपेयी ने मांग की है कि मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में जिस अधिकारी ने एफआईआर दर्ज की थी, अब उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उसने गलत तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट कैसे दायर कर दी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मायावती को आय से अधिक संपत्ति मामले में क्लीन चिट दे दी है।

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