अवैध खनन बना यूपी की शान, अब न कोई दुर्गा न शक्ति-मान
बांदा (रामलाल जयन)। उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड इलाके के कई जिलों में माफिया नदियों का सीना चीर कर अंधाधुंध बालू का अवैध खनन कर रहे हैं, मगर आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल का निलंबन होने के बाद यहां के अधिकारियों में माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की कूबत नहीं दिख रही। न यहां कोई दुर्गा है और न शक्ति-मान।
उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी व ललितपुर में खनिज संपदा का भंड़ार है, इन जिलों के पहाड़ों में ‘काला सोना' यानि ग्रेनाइट पत्थर व नदियों में बालू और केन नदी में शजर पत्थर भारी तादाद में पाया जाता है। शीघ्र धनवान बनने की लालसा में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग 'जुगाड़' लगाकर अवैध खनन करा रहे हैं, मगर खनन माफियाओं के दबाव में गौतमबुद्ध नगर की उपजिला अधिकारी (आईएएस) दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन का खौफ यहां के अधिकारियों को भयभीत कर दिया है। कोई भी अधिकारी इन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा।
पिछले दिनों बांदा जिले में केन नदी के जमवारा, नसेनी, गौर-शिवपुर, मऊ, गिरवां व भूरागढ़ में अंधाधुंध अवैध बालू खनन की शिकायतें सामने आईं, तत्कालीन जिलाधिकारी शीतल वर्मा ने माफियाओं के खिलाफ अभियान छेड़ा तो अखिलेश सरकार ने उन्हें चलता कर दिया। फिलहाल इस जिले में बह रही बागै नदी में मोतियारी, मुगौरा, दुबरिया, भुसासी, सिरसौना, चंदौर, लमेहटा, सिंहपुर-परसेटा, लोहरा आदि गांवों में बालू का अवैध खनन चरम पर है। मीडिया में न उजागर करने की शर्त पर उपजिलाधिकारी अतर्रा सुनील वर्मा ने बताया कि ‘ग्राम प्रधान चंदौर आशा यादव की शिकायत पर वह बुधवार को पुलिस बल के साथ सिरसौना और चंदौर गांव के बागै नदी के घाटों में गए।
वहां अवैध रूप से डंप की गई बालू भी मिली, लेकिन सीज करने से पूर्व ही सत्ता पक्ष के एक विधायक जी का फोन आ गया तो वापस चले आए।' इस अधिकारी की बात पर दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ की गई निलंबन कार्रवाई का खौफ स्पष्ट तौर झलक रहा है। इस संवाददाता ने जब इस अधिकारी से पूंछा कि ‘आप शासन की मंशा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं या संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप? तो अधिकारी का कहना था कि ‘अगर कुटिया में रहना है तो टीपू जी की सहना है।' आशय जाहिर है कि अखिलेश सरकार का कोप झेलने से यह अधिकारी डर रहा है।

विधायक ने बालू खनन कराया
आबकारी विभाग बांदा में वरिष्ठ लिपिक पद पर तैनात जमवारा गांव के रहने वाले नफीस खान कहते हैं, "जमवारा और नसेनी गांव में केन नदी के किनारे-किनारे करीब दो किलोमीटर तक उनकी भूमिधरी काश्तकारी है, समाजवादी पार्टी (सपा) के बबेरू विधायक ने बालू खनन कारोबार में शामिल करने के लिए उससे दो लाख रुपये ले लिया था।" वह बताते हैं कि विधायक जी ने बालू खनन तो कराया, मगर फायदा जाने दें मूल रकम भी नहीं वापस की।

क्या कहते हैं विधायक जी
बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव का कहना है कि वह खुद अवैध खनन के मामले में खनिज अधिकारी से भिड़ गए थे, इसलिए बदनाम किया जा रहा है।

समझौते से मामले सुलझते हैं
खनिज अधिकारी बांदा मनोज कुमार सिंह यादव कुछ और बता रहे हैं। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में विधायक जी ने एतराज जरूर किया था, मगर समझौते से मामला सुलझ गया है। इन्होंने बताया कि अवैध खनन से डंप की गई आठ स्थानों की बालू नीलाम की जा चुकी है।

अवैध खनन किया जा रहा है
नरैनी क्षेत्र के मोतियारी गांव के रहने वाले युवक नवनीत ने बताया कि बागै नदी के नौगवां और मुगौरा घाट से रात में लगातार अवैध खनन किया जा रहा है, अधिकारियों से शिकायत करने पर कोई कार्रवाई तो नहीं होती, उल्टे माफियाओं से दुश्मनी जरूर हो जाती है। नरैनी के उपजिलाधिकारी मोहम्मद नसरुल्ला का कहना है कि खनन करने वालों के ऊपर संबंध हैं, हम जहमत मोल नहीं लेना चाहते।

दुर्गा शक्ति के निलंबन से सब भयभीत
कुल मिला कर यह कहना गलत नहीं है कि बुंदेलखंड में लगातार बालू का अवैध खनन किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के गलत निलंबन से भयभीत होकर इन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं। इस आलेख के साथ भेजी जा रहीं तस्वीरें ताजी है और अधिकारियों का पक्ष भी ताजा है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बुंदेलखंड के भयावह हालात क्या हैं?












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