राजनीति कभी रास नहीं आई बिहारी बाबू शॉटगन को
[नवीन निगम] शत्रुघ्न सिन्हा ने कल कहा कि अगर लोकप्रियता ही पैमाना है तो अमिताभ को राष्ट्रपति बना दो। कम से कम शत्रुघ्न सिन्हा से तो इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं थी एक जमाना था जब शत्रुध्न सिन्हा बड़े विलन रोल के लिए सबकी पसंद होते थे यहां तक की शोले के गब्बर के रोल के लिए भी पहले उन्हें ही साइन करने की कोशिश की गई थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया क्योंकि उन दिनों शत्रुध्न सिन्हा हीरो बनने के लिए लालायित थे और हीरो का रोल वह विलेन से आधे पैसे में भी करने को तैयार थे।
अगर लोकप्रियता कुछ नहीं होती तो लोग उन्हें विलेन के लिए हीरो से ज्यादा पैसा देने के लिए क्यों तैयार थे। दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा राजनीति में कभी फिट नहीं बैठ पाए या यूं कहे कि उन्होंने राजनीति में ठीक समय सही फैसले नहीं किए। वह बिहार के आज भी सबसे लोकप्रिय अभिनेता है अभिताभ और मनोज बाजपेयी से भी ज्यादा।
दरअसल शत्रुघ्न सिन्हा ने राजनीति को कभी गंभीरता से नहीं लिया वह राजनीति को अपने लिए पार्ट टाइम जॉब समझते रहे। क्योंकि बिहार में लोकप्रिय इतना ज्यादा है कि उन्हें बिहार से जुड़ी हर पार्टी अपने साथ रखना चाहती हैं। उनकी बिहार में लोकप्रियता कितनी अधिक है यह एक उदाहरण से आप समझ सकते हैं। 1989 में लोकसभा के चुनाव का समय था शत्रुध्न सिन्हा, देवीलाल और चंद्रशेखर पटना में रैली करने गए थे जिस गेस्ट हाउस में ठहरे थे वहां से रैली स्थल तक जाने के लिए दो लक्जरी कारों का ही प्रबंध किया गया था, शत्रुध्न सिन्हा क्योंकि तैयार होकर देर से निकले इतने में वो दोनों कारें लेकर देवीलाल और चंद्रशेखर रैली स्थल की ओर रवाना हो गए।
शत्रुघ्न सिन्हा देर से तैयार होकर जब निकले और उनके लिए साधारण कार लाई गई तब उन्होंने रैली में जाने से इनकार कर दिया। पटना में रैली के लिए एक लाख से ज्यादा की भीड़ एकत्र हुई थी जब भीड़ को पता चला तो उसने हंगामा करना शुरू कर दिया हालत यह हो गई कि शत्रुध्न सिन्हा को लेने के लिए गाड़ी से खुद देवीलाल को वापस आना पड़ा।
इसी तरह जब एनडीए की सरकार में शत्रुध्न सिन्हा नाराज हो गए कि उन्हें मंत्री क्यों नहीं बनाया गया तो उन्हें अटल ने जहाजरानी मंत्रालय का मंत्री बना दिया। शत्रुध्न सिन्हा कभी अपने मंत्रालय नहीं जाते। यहां तक की अटल बिहारी वाजपेयी से अन्य मंत्रियों और विभाग के अधिकारियों ने भी शिकायत की, लेकिन शत्रुध्न सिन्हा का जलवा इतना ज्यादा था कि कुछ नहीं हुआ। संसद में एक बार किसी प्रश्न का बिहारी बाबू जवाब नहीं दे सके तो उन्हें बकायदा संसद में स्पीकर की डांट भी खानी पड़ी।

इसीलिये शॉटगन को कोई बड़ा पद नहीं मिला
इसी प्रकरण के बाद भाजपा में यह बात आम हो गई कि शत्रुघ्न सिन्हा को कोई भी जिम्मेदारी का पद नहीं दिया जा सकता क्योंकि वह राजनीति को पूरा समय नहीं दे पाते। शत्रुघ्न सिन्हा फिल्मों से लगभग संन्यास ले चुके है और उनके पास समय ही समय है लेकिन उनकी भाजपा में काम न करने की छवि ने उन्हें भाजपा में कोई उचित स्थान नहीं दिलाया तो वह अपना गुस्सा बाहर निकाल रहे हैं।

इनसे बड़ा नेता नहीं था कोई
एक जमाना था कि बिहार में शत्रुध्न सिन्हा से बड़ा कोई राजनेता नहीं था। एनडीए के शासनकाल में जब बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरा तो सरकार बनाने का उसे न्योता मिला। उस समय जदयू से ज्यादा सीटें भाजपा के पास थी भाजपा की तरफ से शत्रुध्न सिन्हा से भी कहा गया कि वह मुख्यमंत्री बने। लेकिन शत्रुध्न सिन्हा जानते थे कि सरकार अपना बहुमत नहीं साबित कर पाएंगी इस लिए नाक कटवाने के लिए सीएम क्यों बना जाए।

नीतीश ने जिम्मेदारी ली
बाद में नीतीश ने इस वादे के साथ यह जिम्मेदारी स्वीकार करी कि यदि आगे सरकार कभी बनेगी तो वहीं गठबंधन के सीएम उम्मीदवार होंगे। शत्रुध्न सिन्हा क्यों नहीं अपनी इस भूल को कोसते हैं जब उन्होंने बिहार में जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया। नहीं तो न आज भाजपा बिहार में मुसीबत झेल रही होती और न वह राजनीति से निर्वासित कर दिए गए होते।

तो अटल नहीं आडवाणी बनते पीएम
यदि लोकप्रियता पैमाना न होता तो अटल नहीं भाजपा से आडवाणी पीएम बनते वो लोकप्रियता ही थी जिसकी वजह से पार्टी की पसंद न होते हुए भी अटल जनता की पसंद के बलबूते प्रधानमंत्री बने। वो लोकप्रियता ही थी कि अकेले वीपी सिंह ने पूरी कांग्रेस को एक नई पार्टी बनाकर पराजित कर दिया। नहीं तो अंतिम समय में चंद्रशेखर और जेठमलानी का कितना बड़ा नाटक हुआ था, लेकिन लोकप्रियता के चलते ही वीपी सिंह को ही पीएम बनाना पड़ा।

राजनीति में पिट चुके हैं अमिताभ
अमिताभ निसंदेह लोकप्रिय अभिनेता है लेकिन वह राजनीति में पिट चुके हैं और इसीलिए वह खुद भी इससे दूरी बनाकर रहते हैं। शत्रुध्न सिन्हा लोकप्रिय तो सन्नी लियोन भी है उसे तो फिर पीएम बनवा दे। परदे की लोकप्रियता और राजनीति की लोकप्रियता दो अलग-अलग विषय है।

फिल्में नहीं इसलिये कर रहे राजनीति
शत्रुघ्न सिन्हा को क्योंकि भाजपा में कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है और सिन्हा को लग रहा है कि वह अब फिल्मों से बाहर आ चुके है इसलिए वह अब राजनीति करना चाहते है और वह जानते है कि बिहार भाजपा को उनकी फिल्मी लोकप्रियता की कितनी जरुरत है और वह उसे ही पार्टी से कैश कराना चाहते हैं।












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