‘पिजंरे में बंद तोते’ को आजाद नहीं करना चाहती केन्द्र सरकार

दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिशा निर्देश जारी होने के बाद अपनी आजादी के लिए जांच एजेंसी ने सुझाव दिए थे, लेकिन केन्द्र सरकार ने इसे मांगने से इंकार कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर इसे खारिज कर दिया।
केंद्र ने सीबीआई के उन आदेशों को मामने से इंकार कर दिया जिसमें सीबीआई निदेशक का कार्यकाल बढ़ाकर तीन साल करने की बात कही गई है। जबकि सरकार इसे दो साल ही रखना चाहती है।
केंद्र ने सीबीआई के इस रुख का भी विरोध किया, जिसमें कहा गया है कि जवाबदेही आयोग की कोई जरूरत नहीं है और बाहरी निगरानी अनिवार्य है। केंद्र ने वरिष्ठ अधिकारियों की जांच की मंजूरी के लिए सीवीसी के नेतृत्व में स्वतंत्र समिति के बारे में भी सीबीआई के रुख का विरोध किया है।
गौरतलब है कि सीबीआई में सरकारी दखलंदाजी की शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी को पिंजरे में बंद तोता कहा था तो आनन-फानन में सरकार ने हलफनामा दाखिल कर जांच एजेंसी की स्वायत्तता का रोडमैप जारी किया था।












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