दुर्गा शक्ति के निलंबन वापसी के लिए जमीन तैयार

(नवीन निगम) एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के केस में डीएम की रिपोर्ट के बाद नया मोड़ आ गया है। डीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मस्जिद की दीवार दुर्गा नागपाल ने नहीं गिराई। यूपी सरकार को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में गौतमबुद्धनगर के डीएम ने कहा है कि यह दीवार गांव वालों ने खुद गिराई है। डीएम की रिपोर्ट आने के बाद सपा सरकार में भूचाल आ गया हैं और पार्टी के अंदर राजनीति गर्मा गई हैं। अखिलेश शुरू से ही इस निलंबन के विरोध में थे लेकिन बताते है कि आदेश क्योंकि सपा सुप्रीमों की सहमति से आया था इसलिए अखिलेश जानकर भी कुछ नहीं कर पाए।

डीएम जानते थे कि यदि वो रिपोर्ट सरकार के पसंद की दे देंगे। तो गाज फिर उनके ऊपर भी गिरेगी। निलंबन में डीएम की रिपोर्ट एक बहुत जरुरी सबूत होता है और क्योंकि प्रशासनिक नजर से डीएम ने जो रिपोर्ट भेजी है अब सरकार उसको देखते हुए दुर्गा का निलंबन वापस ले सकती है लेकिन उनका तबादला कही ओर कर सकती हैं। सपा के अंदर से जो खबरें आ रही हैं उसमें भी यह कहा जा रहा है कि चुनाव नजदीक देखकर सपा भी इस मुद्दे को जल्दी सुलटा लेना चाहती हैं। डीएम की रिपोर्ट यह बताती है कि अब सरकार भी इस मुद्दे को कानूनी तरीके से हल करना चाहती है इसीलिए डीएम से रिपोर्ट मंगवाई गई हैं। जिसके सहारे सरकार दुर्गा का निलंबन वापस लेकर नौकरशाही की बगावत को रोक सके। खबरों के अनुसार सरकार आज रात तक इस बारे में कोई फैसला ले सकती हैं।

Akhilesh govt prepares ground to withdraw Durga Shakti suspension

दरअसल सरकार के एक शक्तिशाली मंत्री आजम खां भी इस मामले में हो रही सरकार की फजीहत से खासे नाराज है और पिछले दिनों इस पर कटाक्ष भी कर चुके हैं। सूत्र बताते है कि अखिलेश और आजम खां इस मामले में एक तरफ हो गए है कि दुर्गा का निलंबन वापस होना चाहिए। सपा सुप्रीमो की हरी झंडी के बाद ही डीएम से रिपोर्ट मंगवाई ही नहीं मीडिया को सार्वजनिक भी कर दी गई है जिससे सरकार अपना फेस बचा सके और कह सके कि डीएम की रिपोर्ट आ गई है इसलिए निलबंन रद किया जा कहा है क्योंकि एसडीएम की वजह से उस इलाके में धार्मिक भावनाएं आहत हुई है इसलिए उनका तबादला किया जा रहा हैं।

डीएम की रिपोर्ट

डीएम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ग्रेटर नोएडा के कादलपुर गांव में अवैध निर्माण की गतिविधियों के मद्देनजर नागपाल पहुंची जरूरी थीं, लेकिन उन्होंने मामला बातचीत से सुलझा लिया था। वहां जो कंस्ट्रक्शन शुरू ही हुआ था उसके बारे में यह क्लियर नहीं है कि वह धार्मिक स्थल था या नहीं। नागपाल ने गांव वालों से कहा कि वे या तो सरकारी नियमों के अनुसार धार्मिक स्थल बनाएं या फिर गैर कानूनी ढांचा गिरा दें। तब गांव वालों ने खुद ही यह ढांचा गिरा दिया था। कोई सरकारी मशीनरी इस काम में उपयोग नहीं लाई गई।

इसके अलावा कादलपुर गांव के कुछ लोगों और जिला पुलिस ने धार्मिक सद्भाव बिगडऩे के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। यहां के लोगों का कहना है कि इस धार्मिक स्थल का निर्माण गांव के सभी धर्मों के लोगों की सहमति से हो रहा था और इसलिए दंगा भड़कने के हालत थे ही नहीं। सूत्रों का कहना है, गौतम बुद्ध नगर में रेत खनन की गतिविधियों से समाजवादी पार्टी के एक सीनियर नेता सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। नागपाल के रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने से उसके खुद के हितों पर चोट पहुंची और उन्होंने नागपाल के ट्रांसफर की कई कोशिशें कीं। लेकिन, जब उनका ट्रांसफर वह नहीं करवा सके तो निर्माणाधीन धार्मिक स्थल के गिराए जाने की घटना को उन्होंने अपने फेवर में भुना लिया।

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