भाजपा ने दिग्विजय सिंह को दी 'मिस्टर बंटाधार' की उपाधि
भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह को मध्य प्रदेश भाजपा ने एक नई उपाधि दी है। उपाधि है 'मिस्टर बंटाधार' की। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि दिग्विजय सिंह द्वारा कांग्रेस कार्यालय में की गयी पत्रकार वार्ता के दौरान ड्रग ट्रायल के जिस विषय को उठाया गया उस पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि राज्य की जनता अभी मिस्टर बंटाधार को भूली नहीं है। रही बात उन मुद्दों की तो उस पर कानूनी कार्रवाई भाजपा सरकार ने ही की है।
तोमर ने कहा, "दिग्विजय सिंह को यह याद रखना चाहिए कि उसमें से कोई भी मामला ऐसा नहीं था जिसे कांग्रेस ने राजनैतिक रूप से उठाया हो और फिर उस पर जांच गठित हुई हो। ड्रग ट्रायल पूरे भारत में जिन परिस्थितियों में होता है, और जिन मौजूदा कानूनों के तहत उसमें पायी गयी अनियमितताओं के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही होना चाहिए थी वह सब भाजपा की सरकार ने कड़ाई से सुनिष्चित किया। जिन आरोपियों के विरुद्ध अनियमितताएं पायी गयी उन्हें कानून ने दंडित भी किया। वहीं दूसरी ओर व्यापंम के विषय में मध्य प्रदेश सरकार के राजनैतिक इच्छाशक्ति के तहत ही जांच एजेंसियां मजबूती के साथ काम कर रही है। कई महत्वपूर्ण लोगों की जांच संस्थाओं ने गिरफ्तारी भी की है और इस पूरी प्रक्रिया में कांग्रेस केवल अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने का काम कर रही है।"
नरेन्द्रसिंह तोमर ने कहा कि दिग्विजय सिंह को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि केन्द्रीय जांच एजेंसियों के कंधे पर बैठकर गठबंधन की सरकार तो चलायी जा सकती है जैसा कि वह दिल्ली में कर रहे है, परंतु चुनाव जीतकर जनादेष नहीं लिया जा सकता है। दिग्विजय सिंह और उनकी पार्टी केन्द्रीय जांच एजेंसियां जैसे सीबीआई, इन्कम टैक्स, एनआईए ही हो के माध्यम से कोई भी आरोप सिद्ध नहीं कर पायी है, इसलिए जांच के दौरान पाए गए आधे अधूरे जानकारियों को अखबारों में छपवाकर मीडिया की सूर्खियां तो बंटोर सकते हैं, आम जनता से वोट नहीं। आज भी मध्य प्रदेश की जनता उनसे उनकी शासन के दौरान खर्च किए गए सरकारी खजाने का हिसाब मांग रही है, जिसे उन्होंने 10 साल भरपूर लूटा।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता ‘‘मिस्टर बंटाढार'' को आज भी नहीं भूली है। यदि दिग्विजय सिंह के पास चरित्रहनन व हिंसा की राजनीति के अलावा यदि मध्य प्रदेश के विकास का कोई दृष्टिपत्र हों तो उन्हें उस पर चुनाव लड़ना चाहिए। कांग्रेस और दिग्विजय सिंह की इस निराशाजनक राजनीति से मध्य प्रदेश की जनता आज भी आहत है।













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