27 रुपये खर्च वाला व्‍यक्ति सरकार की नजर गरीब नहीं: योजना आयोग

नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। सरकार ने गरीबी और अमीरी की सीमा तय करने के लिये एक नायाब तरीका निकाला है। सरकार के मुताबिक जो व्‍यक्ति दिन में 27.20 रुपये खर्च करता है वो गरीब नहीं है। मालूम हो प्रति व्‍यक्ति खपत के आधार पर देश की आबादी में गरीबों का अनुपात 2011-12 में घटकर 21.9 प्रतिशत आ गया है। ये अनुपात वर्ष 2004-05 में 37.2 प्रतिशत था। योजना आयोग ने एक प्रकार से अपने पूर्व के विवादास्‍पद गरीबी गणना के तरीके के आधार पर ही ये नया आंकड़ा निकाला है।

योजपा आयोग के अनुसार, तेंदुलकर फॉर्मूला के तहत 2011-12 में ग्रामीण इलाकों में 816 रुपये प्रति व्‍यक्ति प्रति माह से कम उपभोग करने वाला व्‍यक्ति गरीबी रेखा के नीचे था। वहीं शहरों में राष्‍ट्रीय गरीबी की रेखा का पैमाना 1 हजार रुपये प्रति व्‍यक्ति प्रति माह का उपभोग है। सीधे शब्‍दों में कहें तो शहरों में प्रतिदिन वस्तुओं और सेवाओं पर 33.33 रुपये से अधिक खर्च करने वाला और ग्रामीण इलाकों में 27.20 रुपये खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है।

Planning Commission estimate
उल्‍लेखनीय है कि इससे पहले आयोग ने कहा था कि शहरी इलाकों में प्रतिदिन 32 रुपये से अधिक खर्च करने वाला व्यक्ति गरीब नहीं है। उसकी इस गणना से काफी विवाद पैदा हुआ था। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। विकास से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ एनसी सक्सेना ने सरकार की इस गणना पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा है कि योजना आयोग के अनुमानों में गरीबी रेखा को बहुत कम आंका जा रहा है। महंगाई के दौर में रोजाना 27 रुपये में जीवन यापन बेहद मुश्किल है, लेकिन इससे ज्यादा खर्च करने वालों को गरीबी रेखा से बाहर रखा गया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में देश की 50 फीसदी आबादी को गरीबी रेखा से नीचे मानने का सुझाव दिया था।
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