क्या खास है भाजपा की 20 कमेटियों में
नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार की शाम लोकसभा चुनाव जीतने के लिये नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 20 कमेटियों का ऐलान किया। अगर इन कमेटियों को ध्यान से देखें, तो इनमें से कई ऐसी समितियां हैं, जो कांग्रेस को उखाड़ फेंकने में भाजपा के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हम सीधे ले चलते हैं महत्वपूर्ण कमेटियों पर, जो वाकई में खास हैं।
1. बूथ स्तर कमेटी
भाजपा ने बूथ स्तर पर संसदीय सभाएं करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत एक बूथ पर दस कार्यकर्ता होंगे, जो सभी युवा होंगे। इन समितियों में भाजपा ने जानबूझ कर सिर्फ युवाओं को शामिल करने का निर्णय लिया है, क्योंकि उसे अच्छी तरह पता है कि वही देश की असली शक्ति है। देश भर में एक लाख से ज्यादा छोटी-छोटी समितियां होंगी जो अपने-अपने प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट देंगी। ये सभी बूथ समितियां कैसे काम करेंगी यह तय करेंगे कमेटी के सर्वे-सर्वा थवड़चंद्र गहलोत, जेपी नड्डा, पुरुषोत्तम गोयल और एल गणेशन।

2. बुद्धिजीवी वर्ग कमेटी
भाजपा की यह कमेटी देश के बुद्धिजीवी वर्ग को टार्गेट करेगी। यह कमेटी देश भर के शिक्षक, वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिकारी, आदि हर वर्ग के संगठनों से सीधा संपर्क कर उनके बैनर तले संगोष्ठियां, व्याख्यान एवं परिचर्चाएं आयोजित करायेगी। इस कमेटी की बागडोर संभालेंगे राजीव प्रताप रूडी, प्रकाश जावड़ेकर और तमिलिसाई। यह समिति इसलिये महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का बुद्धिजीवी वर्ग जब आम लोगों के बीच बैठता है, तो राजनीति और देश के बारे में चर्चा जरूर होती है।
3. विजन डॉक्यूमेंट
भाजपा की यह समिति इसलिये महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी को हथियार बनाकर भाजपा देश की जनता को विश्वास दिला पायेगी कि अगले 10 सालों में उसका क्या विजन है। इस कमेटी की कमान नितिन गडकरी के हाथ में होगी। साथ ही वो नव मतदाता अभियान का भी मार्गदर्शन करेंगे। इस डॉक्यूमेंट में विकास के कई बड़े मॉडल प्रस्तुत किये जा सकते हैं। साथ ही देश के किसानों, बेरोजगार युवाओं और महंगाई के बोझ तले दबी आम जनता के लिये एक सुनहरे भारत की बात की जायेगी। यह डॉक्यूमेंट काफी हद तक भाजपा के वोट पक्के करेगा।
4. फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी और सोशल नेटवर्किंग
भाजपा ने पहले ही फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी का गठन कर दिया है। इस संगठन से आम लोगों को जोड़ने का काम किया जा रहा है। ये दोनों कमेटियां खास तौर से शहरों के युवा वर्ग को फोकस करेगी। इन कमेटियों के पास सबसे बड़ी चुनौती सोशल नेटवर्किंग पर लाइक कर रहे लोगों को रियल लाइक में परिवर्तित करने की जिम्मेदारी होगी, जो सबसे कठिन है।
बाकी अन्य कमेटियां अपनी-अपनी भूमिका पिछले चुनावों की तरह ही निभायेंगी, जैसे वार्ड स्तर पर सम्मेलन करना, घोषणा पत्र तैयार करना, किसानों, बुनकरों, आदिवासियों, आदि से सीधा संपर्क करना, रैलियों का आयोजन करना, आदि। यह सभी काम पारंपरिक हैं, लेकिन इस बार इनमें भी कुछ अलग करने से ही बात बनेगी।












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