जानें- आखिर क्या है मिड डे मील और कब हुई थी इसकी शुरूआत?
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। बिहार के सारण जिले में मिड डे मील ने 22 बच्चों को मौत की नींद सुला दिया। पूरे जिले में मातम का माहौल है। मिड डे मील खाने के बाद 48 बच्चे बीमार पड़ गये हैं जिनमें से 5 की हालत नाजुक बताई जा रही है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवार को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की और कहा कि बीमार बच्चों का मुफ्त में इलाज किया जाएगा। इन मौतों के बाद से बिहार में राजनीति गर्म हो गई है और सूबे के मुखिया नीतीश कुमार से इस्तीफे की मांग की जा रही है।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स से लेकर हर मीडिया चैनल, अखबारों से लेकर चौराहे की चाय की दुकान तक सिर्फ और सिर्फ मिड डे मील की ही बात हो रही है। तो आईए आपको बताते चलें कि आखिर क्या है मिड डे मील और कब हुई थी इसकी शुरुआत। मध्यान्ह भोजन (मिड डे मील) योजना भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित की जाती है, जो कि 15 अगस्त 1995 को लागू की गई थी, जिसमे कक्षा 1 से 5 तक के सरकारी, परिषदीय, राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में पढने वाले सभी विद्यार्थियों को, जिनकी उपस्थिति 80 प्रतिशत है, उन्हे हर महीने 3 किलो गेहूं या चावल दिए जाने का प्रावधान था।

मगर इस योजना के अंतर्गत पढ़ने वाले बच्चों को दिये जाने वाले खाद्यान का पूरा फायदा उन्हें न पहुंचाकर उनके परिवार वालों के बीच बंट जाता था जिससे जरूरी पोषक तत्व कम मात्रा में मिलते थे। 28 नवम्बर 2001 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश मे दिनांक 1 सितम्बर 2004 से पका पकाया भोजन प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध कराये जाने की योजना आरम्भ कर दी गई। योजना की सफलता को देखते हुए अक्तूबर 2007 से इसे शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े ब्लॉकों में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालयों तथा अप्रैल 2008 से शेष ब्लॉकों एवं नगर क्षेत्र में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक विस्तारित कर दिया गया।
हिंदूस्तान में प्रकाशित खबर के मुताबिक इस योजना पर साल 2008 से लेकर 2012 तक क्रमश: 5835.44, 6539.52. 6937.79, 9128.44, 9901.92 करोड़ एवं जुलाई 2012 तक 4343.14 करोड़ रुपये खर्च किया जा जुका है। वर्तमान मे इस योजना द्वारा लगभग 12 लाख विद्यालयों के 11 करोड़ विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा रहा है। पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा कर बच्चों में शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता को विकसित करने, विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने, प्राथमिक कक्षाओं में विद्यालय में छात्रों के रुकने की मानसिकता विकसित करने, बच्चों में भाई-चारे की भावना विकसित करने तथा उन्हें एक साथ बिठा कर भोजन कराना, ताकि उनमे अच्छी समझ पैदा हो और विभिन्न जातियों एवं धर्मों के बीच के अंतर को दूर करें, इसके लिए मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण का गठन अक्टूबर 2006 मे किया गया। इस योजना के अन्तर्गत विद्यालयों में मध्यावकाश में बच्चो को स्वादिष्ट भोजन दिये जाने का प्रावधान है। प्रत्येक छात्र को सप्ताह में 4 दिन चावल का बना भोजन तथा 2 दिन गेहूं से बना भोजन दिए जाने की व्यवस्था है।
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