किसकी मोहब्बत में मुलायम, नरेंद्र मोदी पर कर रहे हैं वार?
[नवीन निगम] मुलायम सिंह यादव कुछ बोले और उसके कई अर्थ न हो ऐसा कभी नहीं होता। मुलायम का ताजा बयान मोदी को लेकर आया है जिसमें उन्होंने मोदी को लगभग ताल ठोकते हुए कहा है कि पहले वो यूपी को समझे तब यहां चुनाव लडऩे की सोचें। अब एक बात तो तय हो गई कि मोदी यूपी से चुनाव लडऩे जा रहे हैं। क्योंकि मुलायम ने इसकी पुष्टि कर दी है। मुलायम सिंह के बयान से साफ है कि वो किसी न किसी की मोहब्बत में पड़कर ऐसा कर रहे हैं। यह मोहब्बत किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति है, किसी गठबंधन के लिये या फिर किसी खास समुदाय के वोटरों के लिये है। इसी सवाल का जवाब आपको आगे मिलेगा।
असल में मुलायम सिंह यादव नहीं चाहते हैं कि यूपी के मुसलमान के मन में मोदी के खिलाफ वोट करने की हसरत उसे कांग्रेस के नजदीक खड़ा कर दे। क्योंकि थोड़े दिनों पहले मुलायम आडवाणी और एनडीए के शासन की तारीफ कर चुके हैं, जिससे मुस्लिम मतदाताओं में गलत संदेश चला गया था और मुलायम मोदी के खिलाफ बोलकर अपने वोट बैंक के दिल से उस भ्रम को हटा देना चाहते हैं।
यह अलग बात है कि मुलायम ने आडवाणी की तारीफ इसीलिए की थी कि मोदी भाजपा में ऊपर न चढ़ सके लेकिन अब मोदी भाजपा में पीएम पद के उम्मीदवार लगभग घोषित हो गए हैं। इसलिए मुलायम को मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ रहा है। वैसे मुलायम कभी इस पक्ष में नहीं थे कि मोदी के खिलाफ यूपी में जहर उगला जाए, क्योंकि इससे मोदी को फायदा होगा, लेकिन कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ बयानबाजी शुरू करके मुलायम को मोदी के खिलाफ बोलने के लिए मजबूर कर दिया हैं। क्योंकि मुलायम जानते है कि ऐसा करने से नम्बर चार पर चल रही भाजपा मुख्य लड़ाई में आ जाएंगी और चुनाव मोदी बनाम अन्य हो जाएगा। अब अन्य की कुर्सी पर सपा अपने को जमाए रखना चाहती है इसलिए जैसे-जैसे अब चुनावी पारा चढ़ेगा, मुलायम के एक के बाद एक बयान मोदी के खिलाफ आते चले जाएंगे।
अभी थोड़े दिनों पहले ही अखिलेश एक साक्षात्कार में बोले थे कि छोडि़ए मोदी को उनको यहां कोई नहीं पूछेगा। लेकिन कांग्रेस की मोदी के खिलाफ बयानबाजी ने सपा को चिंता में डाल दिया है और वह अब मोदी और कांग्रेस पर एक साथ वार करेंगी। क्योंकि वह यूपी में राष्ट्रीय पार्टियों के बीच चुनाव नहीं होने देना चाहती। ज्ञात हो कि मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि अगर नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश से चुनाव लडऩा चाहते हैं, तो उन्हें आगे आकर राज्य की संस्कृति और राजनीति सीखनी चाहिए जहां लोग सांप्रदायिक आधार पर नहीं बंटे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए कि उत्तर प्रदेश गुजरात है क्योंकि दोनों राज्यों की संस्कृतियों में जमीन-आसमान का अंतर है, जहां तक राजनीतिक चिंतन और सामाजिक दृष्टिकोण की बात है तो दोनों राज्यों के लोगों में बहुत अंतर है।













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