जानिए कैसे मुसलमानों की सोच बदलेंगे नरेंद्र मोदी
[नवीन निगम] इस कहते एक तीर से दो शिकार करना। नरेंद्र मोदी ने कल अपने जिस माइनॉरिटी प्लान का खाका खींचा है, वह कांग्रेस के लिए किसी चौकाने वाली खबर से कम नहीं हैं। हालत यह हैं कि जब कल इस बारे में कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता मनीष कुमार से पूछा गया तो वह लगभग चौंक गए थे। उन्होंने मोदी के माइनॉरिटी प्लान को एक धोखा बताते हुए सिर्फ इतना कहा कि ...सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। लेकिन मनीष कुमार कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए।
यह एक बानगी थी कि मोदी क्या कर रहे हैं इस बात की कांग्रेस कोई जासूसी नहीं करवा पा रही हैं। मोदी माइनॉरिटी प्लान इसलिए नहीं ला रहे हैं कि प्लान देखकर मुसलमान भाजपा को वोट देने लगेंगे। दरअसल मोदी जिस बात से चिंतित है वो यह हैं कि कहीं मुस्लिम वोट भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के पक्ष में एकजुट न हो जाए।

नरेंद्र मोदी जो माइनॉरिटी प्लान बना रहे हैं उसमें आजादी के कुछ पहले कि घटनाओं और महात्मा गांधी की हत्या के बाद किस तरह मुसलमानों के बीच संघ को बदनाम किया गया उसका सिलसिलेवार ब्यौरा पेश किया जाएगा। माइनॉरिटी प्लान में खास जोर इस बात पर दिया जा रहा हैं कि किस प्रकार कांग्रेस ने हर बार हिंदू महासभा को बचाया और संघ पर निशाना साधा। माइनॉरिटी प्लान में पहली बार देश को यह बताया जाएगा कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का संघ से कोई संबंध नहीं था। वह तो हिंदू महासभा के व्यक्ति थे, महात्मा गांधी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध जवाहर लाल नेहरू ने जानबूझकर लगाया था जबकि हिंदू महासभा पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।
माइनॉरिटी प्लान में मुसलमानों को बताया जाएगा कि आजादी के बाद कांग्रेस के शासन में कहां-कहां दंगे हुए, वह क्यों हुए और उनका क्या परिणाम निकला। दरअसल मोदी देश में ऐसा माहौल पैदा करना चाहते है जिससे लोग खासतौर पर मुसलमान इस विषय पर चर्चा करने के लिए बाध्य हो कि कांग्रेस ने मुसलमानों के हित में कितना काम किया। क्या कांग्रेस हमेशा क्रीमी लेयर के मुसलमानों का हित ही साधती रही। मुसलमानों में पिछड़े तबके को उसने केवल वोट बैंक माना। भाजपा जानती है कि इस माइनॉरिटी प्लान से मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देंगे। लेकिन जब भाजपा कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाएंगी तो कई धर्मनिरपेक्ष पार्टियां जैसे सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस भाजपा को तो कोसेंगी लेकिन साथ ही साथ भाजपा द्वारा उठाई गई बातों पर कांग्रेस को भी घेरेंगी।
भाजपा यही चाहती है कि मुसलमानों को लेकर कांग्रेस ने क्या किया इस पर देश में बहस शुरू हो जाए और मुसलमान वोट भाजपा के खिलाफ एकजुट न हो सके। इसी के साथ जदयू जैसी पार्टिंयों को इस बात का जवाब देते न बने कि मोदी ने भाजपा की तरफ से पहली बार मुसलमानों पर सीधे बात की और संघ और भाजपा के दृष्टिकोण को बदल कर रख दिया। ऐसा हुआ तो कांग्रेस को भाजपा के अलावा उन दलों पर भी हमला करना पड़ेगा जो गाहे बगाहे उसका साथ देते रहते हैं। ऐसी स्थिति में भाजपा अल्पसंख्यक वोटों का ध्रवीकरण रोकने में सफल हो जाएंगी जो उसका अगले चुनाव में मेन एंजेडा हैं।












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