30 दिन में मिले तो जिंदा वरना माना जाएगा मृत: बहुगुणा
देहरादून। 16 और 17 तारिख को जो कोहराम उत्तराखंड में मचा उसके बाद अब सियासी दांव पेंच शुरु हो गया है। इस तबाही ने सैकड़ों लोगों की जिंदगी पलक झपकते ही खत्म हो गई। हजारों लोग अब भी लापता है। लेकिन अब लापता लोगों और राहत कार्यों को लेकर राजनीति शुरु हो गई है। सीएम विजय बहुगुणा ने दावा किया है कि राज्य में अब भी 3000 के करीब लोग लापता हैं।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने घोषणा की है कि उत्तराखंड के लापता लोग अगर अगले 30 दिनों के अंदर नहीं मिलते तो सरकार उन्हें मृत मानेंगी। उत्तराखंड सरकार के इस ऐलान के बाद लापता निवासी 30 दिनों के अंदर वापस नहीं आते तो ये माना जाएगा की उनकी मृत्यु हो गई है।

सरकारा ने लापता लोगों का पता लगाने के लिए जगह-जगह पोस्टर लागए है। टीवी और अखबारों के जरिए विज्ञापण देने का भी मन बनाया जा रहा है। सरकार चाहती है कि जल्द से जल्द लापता लोगों का पता चल सके। अगर इनका पता इक महीने के भीतर नहीं चल पाता तो सरकार उन्हें मृत मान लेगी और उनका मुआवजा अनके परिवारवालों को सौंप दिया जाएगा। सरकार ने इस तबाही में मरने वाले लोगों के दाह संस्कार के लिए 200 लोगों की टीम बनाई है।
सीएम बहुगुणा के मुताबिक दाह संस्कार के लिए बनाई गई ये टीमें केदारनाथ जाएंगी और वहां शवों को निकालकर अंतिम संस्कार करेंगी। इस बीच लापता लोगों के लिए सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है। खुद सेना प्रमुख जनरल बीके सिंह ने भरोसा दिलाया कि जब तक उत्तराखंड में फंसे अंतिम इंसान तक को नहीं बचाया जाता। सेना का ये रेस्क्यू ऑपरेशन अब अपने अंतिम दौर में है। राहत-बचाव कार्य के बीच सियासी बवाल भी शुरु हो गया है। बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने उत्तराखंड के सीएम विजय बहुगुणा का इस्तीफा मांगा है।












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