दुश्मनों की संख्या कम करना चाहता है चीन
(नवीन निगम) चीन ने कहा है कि वह भारत से सीमा विवाद सुलझाने के लिए नए रास्ते तलाशने को तैयार है। लद्दाख क्षेत्र में हाल की घुसपैठ के बाद दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों ने प्रस्तावित सीमा सुरक्षा सहयोग करार (बीडीसीए) पर बातचीत की। लद्दाख क्षेत्र में घुसपैठ की मई की उस घटना के बाद दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की दो दिवसीय सीमा वार्ता के दौरान हुई 16 वें दौर की बातचीत में इसका शीघ्र हल निकालने की बात चीन की ओर से कही गई। शायद लोगों को लगेगा चीन हमेशा धोखा देता रहा है और इस बार भी उसका यह बयान भारत को धोखे में रखने के लिए है लेकिन ऐसा है नहीं क्योंकि चीन अब एक महान राष्ट्र बनना चाहता है अमेरिका की तरह।
वह सोवियत संघ वाली स्थिति में नहीं पहुंचना चाहता। अमेरिका शक्तिशाली इसलिए है क्योंकि उसका किसी के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है। एक जमाने में सोवियत संघ के दम पर उसे आंख दिखाने वाला क्यूबा भी अब शांत हो चुका है। चीन अब इस बात को समझ रहा है कि उसने अपने आसपास शक्तिशाली दुश्मन खड़े कर लिए हैं। जापान, अमेरिका और ऊपर रूस क्या पहले ही कम थे कि उसने हिंद महासागर में अपने शक्तिी प्रदर्शन के चलते भारत और आस्ट्रेलिया को भी अपने दुश्मनों से हाथ मिलाने के लिए मजबूर कर दिया। जापान और भारत के बढ़ते सहयोग ने चीन को भारत की तरफ अपना रूख नरम करने के लिए मजबूर किया है। चीन के लिए भारत की सीमा में अब कुछ नहीं रह गया है वह पहले ही भारत की काफी जमीन हथियाए हुए और तिब्बत पर भारत चीन का अधिकार मान चुका है। बात अटकती है तो सिर्फ अरुणाचल प्रदेश पर। लेकिन अब चीन समझ चुका है कि भारत जो एक परमाणु सम्पन्न देश हैं, से उसके 65 साल से ज्यादा समय से अधिकार में रही जमीन को हासिल करने का अर्थ क्या होगा।

भारत से सौदेबाजी करके चीन थोड़ा बहुत और भी हासिल कर लेगा। भारत सीमा विवाद सुलझने के लिए आतुर है क्योंकि चीन से सीमा विवाद सुलझने से भारत को पाक की तरफ अपना पूरा ध्यान लगाने में आसानी होगी। चीन अब भारत की सीमा तक सड़के बना चुका है। नाथूला दर्रा तक भारत और चीन दोनों ने ही चौड़ी सड़कें बना ली है। चीन की योजना है कि वह भारत के सुरक्षित परिवहन सेवा का फायदा उठाए। इसमें चीन और भारत दोनों को फायदा हैं। चीन का बड़ी मात्रा में भारत में मॉल खपता हैं। जो अभी समुद्र के रास्ते से आता है जबकि दोनों देशों की सीमा पर कई ऐसे रास्ते है, इसके अलावा नेपाल के रास्ते भी चीन भारत के उत्तरी मैदान तक अपना मॉल भेज सकता है जो उसका बहुत बड़ा बाजार है।
इसके अलावा चीन पूर्वी क्षेत्र तो विकास की दौड़ में आगे निकल गया है लेकिन दक्षिण और पश्चिम चीन क्षेत्र खासतौर पर तिब्बत में वह विकास करना चाहता है लेकिन समुद्र दूर होने की वजह से इस इलाके में उघोग धंधों का समुचित विकास नहीं हो पाया हैं। यदि भारत से उसे पश्चिम एशिया तक पहुंचने और भारत के बाजार का रास्ता बनता है तो उसके इन इलाकों में भी उघोग धंधे फल फूल सकते हैं।
ऐसा नहीं है कि इस व्यापार से केवल चीन को फायदा होगा भारत को भी जबरदस्त फायदा होगा। चीन को जितना मॉल भारत नहीं आएगा उससे ज्यादा मॉल भारत के पश्चिमी बंदरगाहों से पश्चिम एशिया के लिए रवाना होगा। इसके अलावा भारत का काफी मॉल सस्ते में चीन जा सकेगा। भारत में परिवहन और सड़कों पर काम बढ़ेगा। जिसका सीधा फायदा भारत को मिलेगा। क्योंकि बार्डर के बाद यह मॉल भारतीय ट्रकों में ही आगे जाएगा।












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