जिंदगी बचाने की आखिरी जंग, उत्तराखंड में अब भी फंसे 10 हजार लोग
देहरादून। उत्तराखंड में कुदरत ने जो महाविनाश मचाया उसका दर्द शायद की कोई अपने मन से निकाल पाएगा। देवभूमि में जो तांडव मचा उसने लोगों की आस्था पर सवाल खड़ा कर दिया। बात किसी के नास्तिक या आस्तिक होने की नहीं है। मन में जो सवाल आता है कि आखिर इंसान को सदबुद्धि और उसे बचाने वाले भगवान ने ये मौत का तांडव क्यों खेला? क्या भगवान हमें हमारे पापों की सजा दे रहे है। अगर ऐसा है तो उन मासूमों को सजा क्यों जो अबतक ठीक से ये तक नहीं जानते कि पुण्य और पाप के बीच फर्क क्या होता है?
इंसान को बचाने वाले भगवान ने ही निर्दोषों की सजा क्यों दे दी? अगर उन्हें हमें सजा ही देनी थी तो पुण्य के इतने बड़े दरबार पर उसने तबाही क्यों मचा दी? खैर जो भी उसने किया परिणाम यहीं निकला की एक साथ उसने करीब 5000 लोगों की जिंदगियां खत्म कर दी। हजारों की जिंदगियों को मंजझार में फंसा दिया। अब भी उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों पर हजारों की तादात में लोग फंसे है। सरकारी आंकड़ों पर अगर विश्वास करें तो अब भी वहां 12000 लोगों की जान फंसी हुई है। जो लोग फंसे हुए है वो अपनी जिंदगी को बचाने के लिए आखिरी जंग लड़ रहे हैं। जिंदगी को बचाने की इस जंग में बार-बार हो रही बारिश जख्म पर नमक मलने का काम कर रही है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मंगलवार सुबह तक भारी बारिश हो सकती है।
खराब मौसम और बारिश के बावजूद बचाव कार्य में जुटी सेना और वायुसेना ने हजारों फंसे यात्रियों को एयरलिफ्ट कर लिया है। सेना की स्पेशल फोर्स ने केदारघाटी के जंगलचट्टी और साथ लगते क्षेत्रों से सात दिन से फंसे लगभग हजार यात्रियों को सुरक्षित जगह पहुंचाया है। ऋषिकेश-ब्रदीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोहबगड़ के पास भारी मात्रा में मलबा आने से राजमार्ग बंद हो गया है। बचाव में लगी सरकार और सेना के मुताबिक केदारनाथ, गौरीकुंड, उत्तरकाशी, अगस्त्यमुनि से ज्यादातर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दिया गया है लेकिन सौ लोग अब भी केदारनाथ मार्ग पर गौरीकुंड में फंसे हैं, लेकिन सेना के लिए कई चुनौतियां अभी भी है।

सेना की चुनौतियां
राहत और बचाव में जुटी सेना और वायुसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती बेहद दुर्गम स्थानों से खराब मौसम में लोगों को सुरक्षित निकालना है।

पानी में बही सड़कें
बारिश बारिश के कारण तेज रफ्तार पानी से सड़कों को बहा दिया है। सड़कों के बह जाने के कारण लोगों को निकालने में सबसे भारी दिक्कत आ रही है।

बारिश ने बढ़ाई सेना की मुश्किलें
सड़कें बह जाने के कारण सेना को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए खतरनाक पहाड़ी रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

जान हथेली पर जिदंगी बचा रहे हैं लोग
भारी बारिश के बाद हुए नदियां उफान पर आ चुकी है। ऐसे में इन्हें पार कर लोगों को सुरक्षित निकालना बड़ी चुनौती है।

बीमार लोगों की जिंदगी बचाना बड़ी चुनौती
एक हफ्ते से ज्यादा फंसे लोग बीमार हो चुके है। अब उनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि वो पैदल चल सके। ऐसे में उन्हें पीठ पर लाद कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

मौत को देख सहमे लोग
मौत को अपनी आंखों के सामने देखकर लोगों सहम चुके है। तबाही ने भले ही उनकी जान नहीं ली हो, लेकिन उन्हें घायल कर मौत के दर्शन जरुर का दिया है।

सेना को सलाम
देहरादून और रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड में बारिश के कारण धुंध और बादल छाए रहे। इससे हेलीकॉप्टर की उड़ानों में दिक्कत हो रही है।

जिंदगी को बचाने कोशिश
बारिश हुई तो केदारघाटी, उत्तरकाशी और चमोली जिले में खोली गईं सड़कों पर मलबा आने का खतरा होगा। इससे यहां फंसे यात्रियों और सेना की परेशानी बढ़ सकती है।












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