8 दिन की नींद के बाद जागे राहुल, दर्द बांटने पहुंचे उत्तराखंड
नयी दिल्ली। भारतीय राजनीति में नेताओं के लिए टाइमिंग का खास महत्व है। किस मौका का फायदा किसने पहले उठाया, इसे खास समझा जाता है। हमेशा से देश में घट रही बड़ी घटनाओं से दूर कांग्रेस के युवराज और नबंर-2 के नेता राहुल गांधी की नींद 8 दिन बाद खुली है।
राहुल को उत्तराखंड की याद 8 दिनों के बाद आयी है। उत्तराखंड में आपदा के 8 दिन बाद आखिरकार राहुल गांधी पहले दिल्ली में प्रकट हुए और फिर जल्दबाजी में दोपहर तक देहरादून भी पहुंच गए।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पहले तो उन्होंने उत्तराखंड में तबाही के शिकार हुए लोगों के लिए राहत साम्रगी को हरी झंडी दिखाकर 24 ट्रकों को ताम-झाम के साथ रवाना किया और फिर बाद में खुद भी उत्तराखंड पहुंच गए।

तबाही की विकट समय में राहुल गांधी के अनुपस्थिति के कारण अबतक बैकफुट पर दिख रही कांग्रेस ने अपनी छवि सुधारने की कोशिश की है। विदेश में मजे लूट रहे राहुल को देश में मची इतनी भीषण तबाही भी खींच नही पाई, लेकिन जब बीजेपी ने इसे मुद्दा बना लिया और उन पर चुटकी लेने लगी तो राहुल को भी लगा कि शायद को मौके पर चौका मारने से चूक रहे है।
फिर क्या था फौरन देश लौटकर सीधे उत्तराखंड पहुंच गए लोगों का दर्द बांटने लगे। लेकिन विरोधियों ने उन के इस कदम को राजनीतिक स्टंट करार दिया और कहा कि 24 ट्रकों को हरी झंडी दिखाने के लिए जिस तरह से बड़ा आयोजन किया गया, उसे देखकर लगता है कि कांग्रेस लोगों की मदद करने के बजाए राहुल का इमेज बनाने के लिए कर रही है।
बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस पर उत्तराखंड में आई तबाही के नाम पर सियासत करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पीड़ितों को मदद भेजने के लिए जिस तरह के सियासी ताम-झाम का सहारा लिया गया, उससे कांग्रेस पर ही त्रासदी पर राजनीति करने के आरोप लगने लगे हैं।












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