जयराम रमेश ने माना 'भस्मासुर' मोदी है कांग्रेस की चुनौती
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। अपने बयानों को लेकर अकसर विवादों में रहने वाले कांग्रेस के अहम रणनीतिकार और केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। जयराम रमेश ने ये स्वीकार किया है कि लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी कांग्रेस के लिये सबसे बड़े चुनौती होंगे। अपने बयान में रमेश ने कहा कि मोदी ना केवल अपने प्रबंधन कौशल की वजह से कांग्रेस के लिये चुनौती हैं बल्कि विचारधारा के स्तर पर भी कांग्रेस को चुनौती पेश होंगे। जयराम रमेश के इस बयान पर विवाद शुरु हो गया है क्योंकि पहली बार किसी कांग्रेस के बड़े नेता ने मोदी को कांग्रेस के लिये चुनौती करार दिया है। मालूम हो कि कांग्रेस हमेशा से ये कहती आयी है कि मोदी को गुजरात के बाहर कोई नहीं जानता।
इस संबंध में जयराम रमेश से पूछा गया कि क्या कांग्रेस मोदी से डरी है तो इसका जवाब देते हुए रमेश ने कहा कि हमें क्यों मोदी से डरना चाहिए? इसमें कोई शक नहीं है कि वह ताकतवर कैंपेनर रहे हैं। भाजपा में पिछले कुछ दिनों से बदल रहे घटनाक्रम को आड़े हाथों लेते हुए रमेश ने नरेन्द्र मोदी को भस्मासुर की संज्ञा दे दी। जयराम रमेश ने कहा कि मोदी ने अपने सीनियर नेता और मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी को भस्मासुर बनकर 'भस्म' कर दिया। कांग्रेस के रणनीतिकार माने जाने वाले रमेश ने कहा, 'मोदी भस्मासुर हैं। वह उन लोगों को भस्म कर देंगे, जिन्होंने उन्हें बनाया और यहां तक पहुंचाया। वह तो अपने मार्गदर्शक आडवाणी को ही भस्म कर गए। मोदी ने 2002 के दंगों में उनके साथ साजिश रचने वाले तोगड़िया को भस्म कर दिया। वह और कुछ नहीं, बल्कि भस्मासुर हैं।'
कौन था भस्मासुर?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भस्मासुर एक असुर था। उसने भगवान शिव की तपस्या कर यह वरदान हासिल कर लिया था जिसके अनुसार वो किसी के सिर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जायेगा। वरदान पाने के बाद उसने भगवान शिव को ही भस्म करने के कोशिश की। उसके बाद इंद्र भगवान ने नर्तकी का भेष धारण कर भस्मासुर को नृत्य कराया और फिर नृत्य के दौरान ही भस्मासुर ने अपने सिर पर हाथ रख दिया और स्वयं भस्म हो गया। मालूम हो कि जयराम रमेश अपने बयानों को लेकर अकसर विवादों में रहे हैं तो आईए रमेश के कुछ विवादास्पद बयानों पर नजर डाल लेते हैं।

जिस घर में शौचालय नहीं उस घर में दुल्हन नहीं
अपने निर्मल भारत यात्रा पर निकले ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि सूखे शौचालय का इस्तमाल करने वालों को जेल की हवा खानी पड़ेगी। कोटा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए जयराम रमेश ने कहा था कि देश में करीब 25 लाख सूखे शौचालय हैं, जिनसे सिर पर मैला ढोने की शर्मनाक प्रथा को बढ़ावा मिलता है। इसके बाद रमेश ने शादी के रिश्ते को शौचालय से जोड़ दिया। रमेश ने कहा कि जिस घर में शौचालय नहीं उस घर में दुल्हन नहीं। यानी लड़कियों को अगर ससुराल में शौचालय न दिखे तो वो ससुराल न जाएं। रमेश की सभा में ज्यादातर महिलाएं थीं। रमेश ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि आप शादी से पहले ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूलता जानने के लिए राहु-केतु आदि के बारे में ज्योतिष से पूछते हैं। आप जब शादी का फैसला कर रहे हों, तब यह भी देखना चाहिए कि दूल्हे के घर में शौचालय है या नहीं।

भारत में मंदिरों से ज्यादा टॉयलेट अहम
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने अपने एक भाषण में एक विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने मंदिरों की तुलना शौचालय से करते हुए कहा था कि भारत में मंदिरों से ज्यादा शौचालय अहम है। उन्होंने देश में शौचालय की जरूरत बताते हुए उसकी तुलना मंदिरों से कर दी थी जिस पर विपक्ष ने खासा हंगामा किया था। विपक्ष ने तत्काल जयराम रमेश को अपनी इस अशोभनिय टिप्पणी पर माफी मांगने को कहा था।

...तो मान लूंगा जिंदा है साई बाबा
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने यूपी के लिए शर्मिंदगी भरा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि स्वच्छता अभियान के बारे में राज्यों के आंकड़े हकीकत से परे हैं। उत्तर प्रदेश की ओर इशारा करते हुए उन्होंने यहां तक कह डाला था कि प्रदेश में अगले 10 वर्षो में खुले में शौच बंद हो जाए, तो मान लूंगा की साई बाबा जिंदा हैं।

देश का सबसे बड़ा खुला शौचालय है भारतीय रेलवे
एक सरकारी कार्यक्रम में जैव-शौचालयों के लिए धन मुहैया कराए जाने के संबंध में बोलते हुए जयराम रमेश ने कहा था कि भारतीय खुले में शौच करने के मामले में दुनिया में नंबर एक हैं। उन्होंने ये भी कहा कि दुनिया में खुले में होने वाले शौच का 60 फीसदी भारत में होता है। यह एक बड़ी ही चिंता का विषय और बड़े ही शर्म की बात है।

महिलाओं को टॉयलेट नहीं, मोबाइल चाहिए
जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा था कि महिलाओं को अब टॉयलेट्स नहीं मोबाइल फोन चाहिए। उन्होंने कहा था कि शौचालय के लिए दी जाने वाली राशि का लोग मोबाइल और अपनी अन्य अरूरतों के ऊपर खर्च कर रहे है। अब महिलाए मोबाइल फोन की मांग करती है टॉयलेट्स की नहीं। भारत का यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि देश में 70 करोड़ मोबाइल फोन है जबकि 60 प्रतिशत लोग खुले में टॉयलेट्स जाते है।












Click it and Unblock the Notifications