मोदी पर नहीं बन रही बात, 'थर्ड फ्रंड' पर आ रहा है याद

नयी दिल्ली। आडवाणी को किनारा कर बीजेपी में मोदी के बढ़ते कद ने एनडीए की मुसिबतें बढ़ा दी है। मोदी को पार्टी का चेहरा बनाए जाने से एनडीए में दरार बढ़ती जा रही है। मोदी बनाम नीतीश की लड़ाई भी अब खुलकर सामने आ रही है। जेडीयू ने मोदी के खिलाफ मोर्चा बुलंद करने का मन बना रही है। नीतीश ने एनडीए में रहने पर दोबार विचार कर रहे है तो वहीं शिवसेना भी मोदी को जिम्मेदारी सौंपे जाने से खुश नहीं है।

मोदी के कारण भाजपा के बदले हालात में थर्ड फ्रंट की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है। ओड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और ममता बनर्जी दोनों ने गैर कांग्रेसी और गैर बीजेपी सरकार बनाने के लिए क्षेत्रीय दलों से एक होने का आवाहन किया है। गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी को जिम्मेदारी सौंपे जाने से बीजेपी में अंदरूनी उठापटक मची हुई है। पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को किनारे करना और मोदी को पार्टी का चेहरा बनाए जाने से बीजेपी-जेडीयू गठबंधन नाजुक दौर में है।

जेडीयू ने संकेत दे दिए है कि अब एनडीए के साथ रहने में उन्हें सोचना पड़ेगा। एनडीए के वजूद पर उठ रहे सवाल को उस वक्त और बल मिल गया जब नवीन पटनायक ने साफ शब्दों में मोदी के न्तृत्व को नकारते हुए थर्ड फ्रंट की तैयारी को हवा दे दी। पटनायक ने दलील देते हुए कहा कि मोदी के इतिहास कोदेकथे हुए अल्पसंख्यक उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। एसे में देश में ना तो राहुल को चाहता है और ना ही मोदी प्रधानमंत्री बन सकते है। देस के सामने अब थर्ड फ्रंट का ही विकल्प बचता है।

मोदी को बीजेपी का तेबहरा बनाए जाने से पश्चिम बंगाल की मुक्यमंत्री ममता बर्नजी भी नाराज है और वो भी इस कुबने करे करीब नजर आ रही है। अपने सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर ममता ने भी गैर कांग्रेसी और गैर बीजेपी सरकार के खिलाफलोगों को एकजुट होने का आवाहन किया है। ममता ने क्षेत्रिय पार्टियों से एकजुट होने होने का आवाहन किया है। वहीं जेडीयू ने बी ममता के इस प्रस्ताव में रुचि दिखाते हुए उनके सुझाव का स्वागत किया है।

जेडीयू जहां ममता के सुझाव का स्वागत कर रही है तो वहीं ओड़ीसा को विषेश राज्य का दर्जा दिए जाने को लेकर दिल्ली में होने वाले बीजेडी की रैली का समर्तन किया है। ममता और नवीन पटनायक ने नीतीश की बढ़ती नजदीकियां उन्हें बीजेपी ने दूर करती नजर आ रही है। गौरतलब है कि यूपीए को समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी पहलेसे ही मौजूदा सरकार से नाराज है। कई बार मुलायम तीसरे मोर्चे की बात कह चुके है। लेकिन चुनाव के बाद भी ये कहना मुश्किल होगा कि मुलायम किस करवट बैठेंगे।

लेकिन मोदी के कारण तीसरे मोर्चे की तैयारी ने जोड जरुर पकड़ दिया है। देखने वाली बात होगी कि क्या इस बार ये मोर्चा बुलंद हो पाएगा या फिर हरबार कि तरह एकबार फिर से ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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