भारतीय-अमेरिकी विशेषज्ञों ने ऊर्जा सुरक्षा सहयोग पर की चर्चा

India, US discuss energy security collaboration.
वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के प्रमुख अनुसंधानकर्ताओं, नीति निर्माताओं और कारोबारियों ने दोनों देशों के ऊर्जा सुरक्षा सहयोग से सम्बंधित रणनीतियों पर चर्चा की है। द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) और येल विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित हाल ही में सम्पन्न हुए 'अमेरिका-भारत ऊर्जा साझेदारी शिखर सम्मेलन' में चर्चा मुख्यत: टिकाऊ विकास पर केंद्रित रही। सम्मेलन का विषय था 'स्टिमुलेटिंग टेक्नोलॉजी, ट्रेड एंड डेवलपमेंट'।

सम्मेलन में भेजे गए एक संदेश में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, (भारत-अमेरिका ऊर्जा वार्ता के जरिए) हमारे समय की ऊर्जा चुनौतियों का समाधान खोजने की दृष्टि से द्विपक्षीय सम्बंध में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि हमारे दोनों देशों की समृद्धि और हमारी दुनिया के टिकाऊ भविष्य के लिए (यह सम्मेलन दोनों देशों के ऊर्जा विशेषज्ञों को) अधिक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पारस्परिक रूप से अधिक सक्रिय करेगा।

देश के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के मामले में दोनों देशों का हित एक दूसरे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण के क्षेत्र में अमेरिकी सहयोग महत्वपूर्ण है, लेकिन विनिर्माण और निवेश जैसे कुछ क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

प्रमुख सम्बोधन में अमेरिका के कार्यकारी ऊर्जा मंत्री डेनियल पोनेमन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी विकास में जो सृजनात्मकता देखी गई, वही रचनात्मकता वित्त क्षेत्र में भी चाहिए, ताकि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में पूंजी की जरूरत पूरी हो सके। अमेरिका में भारत की राजदूत निरूपमा राव ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा भारत के आम लोगों के लिए जीवन और मृत्यु का सवाल है और टिकाऊ विकास के लिए भारत और अमेरिका के बीच सहयोग जरूरी है।

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