सुप्रीम कोर्ट के सहारे आजाद होने की राह पर सीबीआई
[नवीन निगम] कोयला घोटाला हो चाहे रेलमंत्रालय घूस कांड। दोनों ही मामलों में यदि बारीकी से अध्ययन किया जाए तो यह साफ पता चल जाएगा कि सीबीआई अब अपने मालिक यानी सरकार को बेवकूफ बनाने में जुट गई है। पहले सीबीआई कोर्ट में कोयला घोटाले की रिपोर्ट दर्ज कराती है और धीरे से कोर्ट के सामने यह राज खोल देती है कि रिपोर्ट बदल गई हैं।
फिर कोर्ट से जमकर डांट खाती है और अपने मालिक (सरकार) के पास जाकर कहती है कि बड़ी बेइज्जती हुई है अगर रिपोर्ट बदलने की बात नहीं कबूली तो कोर्ट कुछ भी कर सकता है। मालिक से इजाजत लेकर वह कोर्ट को मंत्री समेत वह सारे नाम बता देती है जिन्होंने रिपोर्ट को देखा और उसमें बदलाव किए। मालिक (सरकार) डर जाता है और सीबीआई को आगे कोई निर्देश देने में डरने लगता है। इसी डर के बीच सीबीआई रेल मंत्रालय में घूसकांड का खुलासा कर देती है और मालिक के सबसे प्रिय मंत्री के भांजे को पकड़ लेती है।
मालिक (सरकार) डरा हुआ होता है कि कही इस मामले में कुछ कहा और यह खुल गया तो फिर उसकी (सरकार) फजीहत होगी। सीबीआई की बांछे खिल जाती है वो अपनी आजादी के लिए और प्रयासरत हो जाती है। सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा कहते है कि शीर्ष अदालत ने जो कुछ कहा है, वह सही है। ज्ञात हो कि न्यायालय ने बुधवार को ही सीबीआई की आलोचना करते हुए कहा था कि यह पिंजरे में बंद तोता है जो अपने मालिकों के सुर में बोलता है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ताकीद कर दी है कि आगे से कानून मंत्री ही नहीं किसी भी मंत्री को रिपोर्ट की भनक तक न लगने दी जाए। सीबीआई के निदेशक सिन्हा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने जो कुछ कहा है, वह सही है।
सीबीआई ने कहा कि सीबीआई उच्चतम न्यायालय को आश्वस्त करती है कि कोयला मामले में गहन एवं गुणात्मक जांच की जाएगी। एजेंसी ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेगी। यानी कि अब वह अपने मास्टर (सरकार) को इस मामले में कोई जानकारी नहीं देगी। जब कोई जानकारी नहीं देगी और मालिक (सरकार) भयभीत रहेगा तो सीबीआई एक तरह से आजाद संस्था हो जाएगी। एक बार नजीर पड़ गई तो सीबीआई भी जानती है कि उसके पास सरकार के खिलाफ इतने हथियार है कि वो आसानी से अपनी आजादी बनाए रख सकती है। सीबीआई के पूर्व निदेशक और अपने समय में काफी चर्चित रहे जोगिंदर सिंह ने भी माना है कि सीबीआई को अब सरकार के हाथों से बाहर निकालना ही होगा।













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