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क्‍या है दौलत बेग ओल्‍डी, जिसके लिये पगलाया चीन

नई दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। दौलत बेग ओल्‍डी पर चीनी सेना के वापस हटते ही भारत के लोगों में एक अजब सी खुशी दिखाई दी। ऐसा लग रहा था मानो कोई जंग जीत ली। हालांकि लद्दाख के इस इलाके में हुई घुसपैठ पर भारतीय कूटनीति एकदम सटीक निशाने पर लगी और ड्रैगन को पीछे हटना पड़ा। इतना सब हो रहा है, लेकिन आज भी तमाम लोग ऐसे हैं, जो दौलत बेग ओल्‍डी के बारे में जानते नहीं। आखिर ऐसे क्‍या कारण हैं, जो चीन को यही एक जगह मिली अपने राष्‍ट्र का झंडा गाड़ने के लिये।

दौलत बेग की कहानी हम शुरू करेंगे उन शब्‍दों से जो चीनी सेना के बैनर पर लिखे थे, "आप चीन की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं"। इसी बैनर के साथ चीन ने सरहद से 19 किलोमीटर अंदर घुस कर अपने पांच टेंट लगाये और झंडे गाड़ दिये। ऐसा इसने इसलिये किया क्‍योंकि यहां से सीधा रास्‍ता जाता है चीन के जिनजियांग शहर में यारकंड तक। लद्दाख से शुरू होने वाले इसी रास्‍ते के जरिये पुरातन काल में दोनों देशों के बीच व्‍यापार होता था। इस दूरस्‍थ इलाके में आज भी मोबाइल फोन नहीं चलता। यहां सिर्फ सैटेलाइट फोन के जरिये ही बात की जा सकती है।

दौलत बेग ओल्‍डी लद्दाख की वो ऐतिहासिक जगह है, जहां पर भारतीय सेना का मिलिट्री बेस है। यहां पर चिपचप नदी भी बहती है। कराकोरम रेंज में स्थित दौलत बेग इस इलाके का सबसे ठंडा इलाका है, जहां से चीन सीमा यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल सिर्फ 8 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा सियाचिन के ग्‍लेशियर है जहां भारत के मिलिट्री बेस हैं। यहां से दक्षिण की ओर मुर्गो है, जहां बाल्‍टी समुदाय के लोग रहते हैं। असल में यही यहां के स्‍थानीय निवासी हैं, जो याक और एप्रीकॉट पर अपना जीवन बसर कर रहे हैं। यहां का तापमान जाड़े में -30 डिग्री तक रहता है। यहां बर्फ गिरना आम बात है। पुराने जमाने में यहीं से व्‍यापार होता था, लेकिन 1962 की भारत-चीन जंग के बाद इस रास्‍ते को बंद कर दिया।

क्‍यों बार-बार चीन की नजर रहती है दौलत बेग पर

1. इतिहास- इस स्‍थान का नाम दौलत बेग ओल्‍डी 16वीं सदी में यारकंडी के एक दार्शनिक के नाम पर पड़ा। वो चीन का रहने वाला था, लेकिन उसकी मृत्‍यु इसी स्‍थान पर हुई थी। नाम से देखा जाये तो दौलत बेग ओल्‍डी एक भारतीय नाम है, इसमें चीनी भाषा का कोई शब्‍द भी नहीं है। लेकिन सिर्फ इसी ऐतिहासिक घटना के कारण चीन बीच-बीच में इस स्‍थान पर अपना दावा पेश करता रहता है।

2. पक्‍की सड़क- भारत सरकार ने 2001 में सबसे पहले 2001 में लेह से दौलत बेग तक पक्‍की सड़क बनाने का फैसला किया। तभी से चीन कुछ चिढ़ गया। फिर भारत ने पक्‍की सड़क का निर्माण किया जिस वजह से चीन उसे कुछ बोल तो नहीं पाया, लेकिन खुन्‍नस जरूर भरी रह गई।

3. मिलिट्री बेस- दौलत बेग में भारतीय वायुसेना के हेलीपैड के साथ-साथ एयरबेस भी बने हुए हैं। यही नहीं यहां पर भारतीय सेना के जवान हमेशा मुस्‍तैदी से तैनात रहते हैं। सबसे खास बात यह कि चीन की एयरफोर्स को पहाड़ों पर जंग लड़ने का अनुभव नहीं है, इसलिये भारतीय एयरबेस उसे अखरते रहते हैं।

आगे पढ़ें- कैसे फंस गया ड्रैगन | तब छटपटाने लगा ड्रैगन | कारगिल से बड़ी विजय

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