कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट को सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट ने दलील दी है कि देश और लोगों के विकास को देखते हुए इस प्लांट पर रोक नहीं लगाया जा सकता है। वर्तमान और भविष्य में देश में परमाणु प्लांट की जरूरत है। इसलिए कुडनकुलम प्लांट को बंद नहीं किया जा सकता है। मद्रास हाईकोर्ट ने कुडनकुलम परमाणु परियोजना को सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किये जाने के आधार पर उसे बंद करने का आदेश दिया था। जिसके बाद हाईकोर्ट के फासले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। जिसमें कहा गया कि प्लांट में सुरक्षा के बारे में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर अमल नहीं किया गया। परमाणु कचरे के निष्पादन और प्लांट का पर्यावरण पर प्रभाव से जुड़े सवाल भी उठाए गए। प्लांट के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का सवाल भी उठाया गया।
लेकिन आज इसे मंजूरी मिल गई है। जस्टिस केएस राधाकृष्णन और दीपक मिश्रा की बेंच ने तीन माह की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। हालांकि इस विरोध के बावजूद संयंत्र के पक्ष में केंद्र और राज्य सरकार के साथ ही न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन की ओर से कहा गया है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है।












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