कानून-व्यवस्था पर ही बसपा लड़ेगी लोस चुनाव

लखनऊ (नवीन निगम)। अम्बेडकर जयंती पर रमाबाई अंबेडकर मैदान पर आयोजित रैली में मायावती आज अपने चिर परिचित अंदाज में दिखाई पड़ी, लेकिन आज उनके भाषण में एक खास बात थी, वो सपा सरकार को कोसती रही लेकिन मुलायम या अखिलेश को उन्होंने सीधे-सीधे नहीं कोसा। हां इतना जरुर है कि अगामी लोकसभा चुनाव बसपा किस एजेंडे पर लड़ेगी यह आज तय हो गया। एंजेडा वही रहेगा जिसपर बसपा 2007 का विधानसभा चुनाव लड़ी थी और जीती थी, हां उसमें प्रदेश में बड़ी संख्या में हुए दंगे का आकंडा भी इस बार शामिल होगा। जो मुस्लिमों को अपनी ओर लुभाने का काम करेगा।

मायावती जो विधानसभा चुनाव होने के बाद हुए नगर परिषदों के चुनाव को इसलिए नहीं लड़ी थी कि बड़ी संख्या में बसपा कार्यकर्ता मारे जा सकते है वह सपा के एक साल के कार्यकाल से उत्साह में नजर आ रही थी उनके चेहरे का उल्लास देखते ही बनता था। यह इस बात से साफ झलक रहा था कि आज उन्होंने मंच से कई बार बसपा के खिलाफ सपा के प्रभाव में आकर कार्य कर रहे अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बसपा के खिलाफ कार्य करने वाले अधिकारियों की सूची बनाई जा रही है।

Mayawati

थोड़े दिनों पहले तक मायावती अधिकारियों से यह बात कहते हुए नहीं दिखाई पड़ती थी, यानी मायावती को भी अब यह अंदाजा लग गया है कि प्रदेश के उच्च अधिकारी भी अगली बार बसपा सरकार के बनने की दिशा में विचार करने लगे है और यदि यह विचार अधिकारियों के दिल में न होता तो मायावती उन्हें यह धमकी न देती। एक तरह से अधिकारियों को दी गई चेतावनी कही न कही यह दर्शा रही है कि अधिकारियों की नजर में भी सपा का शासन उस उच्चकोटि का नहीं चल रहा है जहां उसके दोबारा चुनाव जीतने की प्रबल आशा हो। नहीं तो मायावती अधिकारियों को इस तरह चेतावनी न जारी करती।

उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों खासतौर पर बसपा के साथ बदले की भावना से काम किया जा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण कल यहां से हटाए गए बैनर, पोस्टर व होर्डिग्स हैं। अनुमति के बावजूद यह ओछी हरकत की गई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जो लोग सपा के दबाव में बसपा के साथ दुव्र्यवहार कर रहे हैं उन पर नजर रखी जा रही है। सत्ता में आने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि भाटपार रानी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उसने सपा की जीत सुनिश्चित कराने में मदद की थी।

हंडिया सीट पर भी उपचुनाव होना है। अधिकारियों ने दोबारा गड़बड़ी की तो बसपा सत्ता में आने पर इसकी जांच कराएगी। कुल मिलाकर बसपा की इस रैली में आए कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखा जो शायद सपा की बदनाम होती कानून व्यवस्था से उपजा था।

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