'कश्मीर में लश्कर को मोहरा बना सकता है पाकिस्तान'

न्यूयार्क के वेस्ट पॉइंट स्थित अमेरिकी सैन्य अकादमी में काम्बैटिंग टेररिज्म सेंटर द्वारा तैयार की गई 61 पृष्ठों की इस अध्ययन रपट का शीर्षक है- 'लश्कर-ए-तैयबा के लड़ाके : भर्ती, प्रशिक्षण, तैनाती और मौत'। यह रपट प्रारम्भिक तौर पर लश्कर और पाकिस्तानी समाज के साथ इसके जुड़ाव पर केंद्रित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी समय दक्षिण एशिया में जिहाद की रणभूमि रहे कश्मीर मेंलड़ाई 'पिछले एक दशक के दौरान जिहादियों के लिए उतनी प्रासंगिक नहीं रही है, क्योंकि अफगानिस्तान में अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय सेनाओं की मौजूदगी आतंकवादी संगठनों को एक प्रत्यक्ष एवं आकर्षक लक्ष्य बनी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कहना अभी मुश्किल होगा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सुरक्षा बलों की वापसी और भूमिका कम हो जाने के बाद लश्कर-ए-तैयबा की प्राथमिकताएं क्या होंगी। विशेषकर तब जब पाकिस्तान देश के भीतर ही आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा हो। लेकिन इतिहास इस तरफ संकेत करता है कि इनमें से कुछ आतंकवादी संगठन अपना रुख बदल सकते हैं और कश्मीर में संघर्ष में बड़े पैमाने पर अपने को शामिल कर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी में नियंत्रण रेखा के करीब पाकिस्तान और भारतीय सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प कश्मीर में नए सिरे से संघर्ष की ओर इशारा करती है। अध्ययन में आश्चर्य व्यक्त किया गया है कि क्या यह घटना वहीं खत्म हो गई, या दोनों पड़ोसियों के बीच यह बड़ी हिंसा की सूचक है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, "यदि पाकिस्तानी सुरक्षा महकमे में शामिल तत्वों को लगा कि क्षेत्र में अशांति पैदा करना या संघर्ष की आग भड़काना उनके हित में होगा, तो वे अपना दांव खेलने के लिए लश्कर-ए-तैयबा जैसे विश्वस्त पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों की ओर रुख कर सकते हैं," और उनकी मदद ले सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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