पीएम की रेस में दौड़ ही नहीं सकते आडवाणी
[अजय मोहन] दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय गोयल ने लाल कृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता कर मीडिया में हलचल मचा दी। उनका बयान आते ही देश भर के चैनलों पर आडवाणी को पीएम इन वेटिंग की गाथा शुरू हो गई, लेकिन सच पूछिए तो भाजपा से पीएम पद की रेस में आडवाणी को खड़ा कर ही नहीं सकती। जी हां इसका सबसे बड़ा कारण हैं नरेंद्र मोदी।
देश भर में भाजपा के कार्यालयों में सक्रिय छोटे-छोटे कार्यकर्ता जब जनता के पास जाते हैं, तो नमो-नमो ही करते हैं। गुजरात के बाहर भी अब भाजपा के पोस्टरों पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर मानो कम्पलसरी हो गई है। वहीं इंटरनेट पर सोशल मीडिया के माध्यम से भाजपा ने मोदी को पूरी तरह प्रोजेक्ट कर दिया है। अगर आप फेसबुक पर देखें तो आपको नरेंद्र मोदी फॉर पीएम का पेज मिलेगा, लेकिन आडवाणी फॉर पीएम नाम का कोई पेज नहीं मिलेगा। एक ग्रुप जरूर है, जिसमें मात्र 56 लोग हैं, जबकि मोदी फॉर पीएम के 9.3 लाख फॉलोवर्स हैं। यही नहीं एफबीग्रुप वी सपोर्ट नरेंद्र मोदी के 1 लाख 33 हजार सदस्य हैं। वहीं सुषमा स्वराज फॉर पीएम के मात्र 15 फॉलोवर्स हैं।
जरा सोचिये अगर भाजपा ने अचानक आडवाणी को प्रोजेक्ट कर दिया, तो इंटरनेट पर सक्रिय रहने वाले 10 लाख लोगों के साथ सीधा धोखा होगा। यही नहीं अगर इन 10 लाख लोगों के साथ औसतन 100 लोग ऑफलाइन जुड़े होंगे, तो सीधे सीधे 10 करोड़ लोग निराश हो जायेंगे। यानी भाजपा के हाथ से 10 करोड़ वोट ऐसे ही फिसल जायेंगे। और कोई भी पार्टी ऐसा नहीं होने देगी।
लिहाजा विजय गोयल ही नहीं, अगर अरुण जेटली या मुख्तार अब्बास नकवी जैसे वरिष्ठ नेता भी अगर इस समय आडवाणी के नाम की माला जपना शुरू कर दें, तो भी आप यकीन मत करियेगा, क्योंकि भाजपा का अंतिम निर्णय चुनाव से ठीक पहले होगा। और हां यह जरूर तय है कि अगर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को पूर्ण बहुमत मिल गया और सहयोगी दलों के दबाव के चलते अगर नरेंद्र मोदी पीएम नहीं बने तो किंग मेकर जरूर बनेंगे। ऐसी परिस्थिति आने पर मोदी जिसे चाहेंगे उसी के हाथ में देश की कमान होगी।













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