एक और रेपिस्ट को मिलेंगी फांसी, राष्ट्रपति ने 5 की दया याचिका खारिज की

दरअसल राष्ट्रपति प३णव मुखर्जी के पास ऐसी 7 दया याचिकाएं आई थीं, इनमें से उन्होंने 5 की फांसी बरकरार रखी, जबकि दो दोषियों की फांसी सख्त आजीवन कारावास में बदल दी। जिन पांच दोषियों को फांसी की सजा बरकरार रखी गई है उनमें हरियाणा का धर्मपाल सबसे पहले फांसी पर लटकेगा। सोनीपत के धर्मपाल पर लड़करी के साथ रेप का मामला दर्ज है। 1991 में उसने लडकी के साथ रेप किया था, जिसके बाद 1993 में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई थी।
सजा के दौरान ही उसे पांच दिनों के लिए पैरोल पर छोड़ा गया था। पैरोल पर रिहा होते ही धर्मपाल ने पीड़ित लड़की के मां-बाप समेत 5 लोगों की हत्या कर दी थी। जिसके बाद कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने धर्मपाल की सजा कायम रखी। धर्मपाल ने 1999 राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल की लेकिन अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी है। धर्मपाल फिलहाल रोहतक जेल में बंद है और उसे अगले एक से दो हफ्तों में कभी भी फांसी दी जा सकती है। धर्मपाल के अलावा सात अन्य दोषियों ने राष्ट्रपति से दया की याचिका की थी, जिनमें से 5 की दया याचिका खारिज हो गई है।
7 दोषियों ने की थी राष्ट्रपति से दया की अपील
1. हरियाणा का धर्मपाल- इनपर लड़की से रेप करने के बाद उसके परिवार के पांच सदस्यों की हत्या का आरोप है।
2. हरियाणा के पूर्व विधायक की बेटी सोनिया और उसका पति संजीव जिन्होंने 2001 में हिसार में जहरीला पदार्थ देकर अपने परिवार के आठ लोगों को मारा था।
3. उत्तराखंड का सुंदर सिंह- जिस पर 1989 में एक रेप और मर्डर कांड को अंजाम दिया।
4. उत्तर प्रदेश का जफर अली- जिस पर 2002 में अपनी पत्नी और पांच बेटियों की हत्या कर दी थी।
5. कर्नाटक का प्रवीण कुमार- जिस पर 1994 में एक ही परिवार के चार सदस्यों को मार डाला।
6. उत्तर प्रदेश का गुरमीत सिंह- जिस पर 1986 में एक ही परिवार के 13 लोगों का कत्ल किया।
7. उत्तर प्रदेश के सुरेश और रामजी- जिन पर अपने छोटे भाई के परिवार के पांच लोगों को मारा था।












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