सीआईआई में राहुल गांधी के भाषण के मुख्‍य बिंदु

नई दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। सीआईआई के सम्‍मेलन में कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने गरीबों की नब्‍ज को पकड़ा और उद्योगपतियों से अपील की कि वे उनकी धड़कनों को सामान्‍य स्‍तर पर लाने के प्रयास करें। उन्‍होंने कहा कि हर तबके के व्‍यक्तियों को एक साथ लेना जरूरी है, अगर नहीं लेंगे, तो देश आगे बढ़ने के बजाये पिछड़ने लगेगा। उन्‍होंने अपने भाषण में अपने जीवन के अनुभवों को भी शेयर किया।

राहुल ने कई कहानियां सुनायीं, उन्‍होंने अपने गोरखपुर-लोकमान्‍य तिलक के सफर से लेकर इटली तक के अनुभवों को शेयर किया। राहुल ने कहा कि आज देश के लोगों के पास सीधे जवाब तक नहीं बचे हैं, वो अपने जीवन में इस प्रकार उलझ चुके हैं कि हर प्रश्‍न का उत्‍तर जटिल होता है। अगर आप दुनिया में जाकर देखें, तो अमेरिका, रूस, चीन के लोग बहुत ही सुलझे हुए मिलेंगे, जबकि भारत में उलझनें इतनी ज्‍यादा हैं कि वो सीधी बात तक नहीं कर पाते।

हम इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट करके सोचते हैं, सारा विकास हो गया, लेकिन जब तक आम लोगों की उलझनों को नहीं दूर करेंगे, तब तक हम असफल ही माने जायेंगे। उन्‍होंने कहा कि एक व्‍यक्ति लाखों लोगों की समस्‍या हल नहीं कर सकता। हमें अपने सिस्‍टम में परिवर्तन करना होगा और सांसदों से लेकर ग्राम प्रधानों तक सभी को देश के नीति निर्धारण में शामिल करना होगा। हमें चिन्हित करना होगा कि कौन क्‍या जिम्‍मेदारी उठा सकता है और जिम्‍मेदारियां बांट कर ही आगे बढ़ सकते हैं और यह सब सार्थक एक बड़े बिजनेस मॉडल के माध्‍यम से ही हो सकता है।

पीएम बनने के सवाल पर राहुल ने कहा, "मेरा पीएम बनना नहीं बनना बेमतलब है। मैं बता दूं कि एक आदमी देश की व्‍यवस्‍था में परिवर्तन नहीं कर सकता। देश को बदलने के लिये सामूहिक प्रयास चाहिये।"

राहुल के भाषण के मुख्‍य बिंदु

सबको अधिकार

सबको अधिकार

राहुल गांधी ने कहा कि सबको अधिकार देंगे, तो सबकी मुश्किलें दूर होंगी। इसके लिये हमें ग्राम पंचायत स्‍तर तक जिम्‍मेदारी तय करनी होगी। ऐसा इसलिये नहीं हो पाता है, क्‍योंकि राज्‍य सरकारें और केंद्र सरकार अलग-अलग रास्‍तों और नियम कानून पर चलती हैं। उन्‍हें समंजस्‍य तो स्‍थापित करना ही होगा।

भारत मधुमक्‍खी का छत्‍ता

भारत मधुमक्‍खी का छत्‍ता

राहुल ने कहा कि भारत मधुमक्‍खी का छत्‍ता है, जिस पर ढेर सारी मक्खियां रूपी समस्‍याएं चारों दिशाओं से आती हैं और उसे जटिल बनाती चली जाती हैं।

मुंबई के लिये महत्‍वपूर्ण हैं बिहारी

मुंबई के लिये महत्‍वपूर्ण हैं बिहारी

राहुल ने अपने भाषण में कहा कि लोग कहते हैं मुंबई से बिहारियों को बाहर कर दो। अगर हम एक बार इस बात पर अमल कर एक बार बिहारियों को मुंबई से बाहर कर भी दें, तो क्‍या होगा। मुंबई की अर्थव्‍यवस्‍था मिनटों में ढह जायेगी। उसी प्रकार अगर कोई यह कहता है कि मुस्लिमों को विकास की मुख्‍यधारा से अलग कर दो, तो ऐसा करने पर देश के विकास की गति वहीं रुक जायेगी।

देश की ताकत एक अरब आवाज़

देश की ताकत एक अरब आवाज़

राहुल ने कहा कि देश की ताकत एक अरब लोगों की आवाज़ है और जब तक आम लोगों की आवाज़ बुलंद नहीं होगी, तब तक विकास की रफ्तार तेज नहीं हो सकती।

अलग बिजनेस मॉडल की जरूरत

अलग बिजनेस मॉडल की जरूरत

देश को एक अलग बिजनेस मॉडल की जरूरत है, जो सभी वर्गों के लोगों को पार्टनर बनाकर चले। उद्योग जगत को लोगों को सुनना होगा, उनकी समस्‍याओं को देखते हुए आगे बढ़ना होगा और यह सब संभव एक अलग बिजनेस मॉडल के साथ हो सकता है।

नौकरी नहीं सही ट्रेनिंग की जरूरत

नौकरी नहीं सही ट्रेनिंग की जरूरत

देश में इस समय नौकरियों की कमी नहीं है, बल्कि जरूरत है सही ट्रेनिंग की। सही मायने में देखें तो हमारी शिक्षा व्‍यवस्‍था ऐसी होनी चाहिये। विश्‍वविद्यालयों के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को बदलने की जरूरत है।

अकेले सरकार नहीं कर सकती देश का विकास

अकेले सरकार नहीं कर सकती देश का विकास

उन्होंने कहा कि देश का विकास अकेले सरकार के हाथों में नहीं है इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों में ही सामंजस्य बिठाना बेहद जरूरी है।

भारत में ऊर्जा की कमी नहीं

भारत में ऊर्जा की कमी नहीं

"हम भारत को एक राष्ट्र के रूप में ही देखते आ रहे हैं, लेकिन यदि हम 100 वर्ष पीछे जाएं तो पाएंगे कि भारत वास्तव में ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक था।"

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