मौका होली का और नजारा दीपावली जैसा!
सीतापुर। अनेकता में एकता को संजोए भारत में मनाया जाने वाला पर्व होली यूं तो रंगों का त्योहार है, लेकिन उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में रंगों के त्योहार होली पर्व पर दीपावली का नजारा भी देखने को मिलता है। सीतापुर में होली के पर्व पर मनाई जाने वाली दीपावली सरीखे जश्न की खास बात यह है कि यह हिन्दू-मुस्लिम एकता की गंगा-जमुनी तहजीब की अद्भुत मिसाल पेश करता है। प्रशासन की देखरेख में होने वाले हिंदुओं के पर्व होली पर मुस्लिम आतिशबाज दीपावली का अद्भुत नजारा पेश करते हैं। प्रशासन की तरफ से आतिशबाजों को पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है।
वृत्तासुर नामक असुर (राक्षस) ने जब देवताओं पर उत्पात मचाया तो देवताओं ने महर्षि दधीचि से वज्र बनाने के लिए उनसे उनकी अस्थियां मांगी। महर्षि दधीचि ने कहा कि पहले हम सारे तीर्थो की परिक्रमा करेंगे। इस पर देवताओं ने महर्षि दधीचि से कहा कि ऋषिवर सारे तीर्थो की परिक्रमा करने में बहुत समय लगेगा और यह मायावी राक्षस देवताओं को परेशान करेगा। देवताओं ने महर्षि दधीचि से कहा कि हम देवतागण सारे तीर्थो का जल ले आते हैं, तब आप उसकी परिक्रमा कर लें।
महर्षि दधीचि ने देवताओं का अनुरोध स्वीकार कर लिया और देवताओं द्वारा लाए गए सभी तीर्थो के जल पर चौरासी कोस की परिक्रमा कर अपने शरीर पर नमक लगाकर गायों से अपना शरीर चटवाकर अपनी अस्थियां देवताओं को दान कर दीं और प्राण त्यागे। उनकी अस्थियों का वज्र बनाकर वृत्तासुर राक्षस का वध किया गया। सारे तीर्थो का जल इस तीर्थ में डाला गया था इसलिए इसका नाम मिश्रित तीर्थ है। और इस स्थान पर श्रद्धा और विश्वास के साथ भक्त चौरासी कोस की फाल्गुन मास में परिक्रमा करते हुए होलिका दहन के दिन मिश्रिख तीर्थ पर स्नान कर पूजा करते हैं।
इस अवसर पर महर्षि दधीचि के त्याग पर सैकड़ों वर्षो से चौरासी कोसी होली परिक्रमा मेला लगता है। चौरासी कोसी परिक्रमा करने वाले भक्त साधु-संतों को रामादल कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री राम ने भी मिश्रिख आकर चौरासी कोस की परिक्रमा की है। यहां के सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक होली परिक्रमा मेले में जब यह रामादल होलिका दहन के समय मिश्रिख तीर्थ पहुंच कर पूजा अर्चना करता है, उस समय इकट्ठा हजारों लोग रामादल का स्वागत सत्कार करते हैं। यहां होलिका दहन के अवसर पर शानदार आतिशबाजी का आयोजन भी होता है, जिसे मेला प्रशासन द्वारा नगर पालिका परिषद मिश्रिख के तत्वाधान में किया जाता है।
इस आतिशबाजी कार्यक्रम में क्षेत्र के मशहूर आतिशबाज अपनी-अपनी कलाकारी के साथ जमीनी और आसमानी आतिशबाजी के अदभुत नजारे पेश करते हैं। आतिशबाजी का यह कार्यक्रम करीब तीन घंटे चलता है। सर्वश्रेष्ठ तीन आतिशबाजों को प्रथम-द्वितीय और तृतीय पुरस्कार स्वरूप नगद राशि का चेक प्रदान कर किया जाता है।
सीतापुर एक धार्मिक नगरी है। यहां होली के अवसर पर किया जाने वाला आतिशबाजी का कार्यक्रम क्षेत्र की साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बन चुका है, क्योंकि जब रामादल होलिका दहन के अवसर पर मिश्रिख पहुंचता है तो हिंदुओं के पर्व होली पर आतिशबाजी का कार्यक्रम सभी मुसलमान आतिशबाज ही करते हैं। क्षेत्र का यहा कार्यक्रम आज हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बन चुका है तथा आपसी सौहाद्र्र को और मजबूत करता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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