सैलानियों को भारत खींच लाते हैं होली के रंग
नई दिल्ली (ब्यूरो)। जीवन को प्राकृतिक रंगों से सराबोर करने की तमन्ना, कुरकुरे गुजिया, ठंडई और भावपूर्ण होली गीत का नशा विदेशी शैलानियों पर कुछ इस कदर सवार होता है कि वे भारत में होली खेलने खिंचे चले आते हैं। मथुरा, वाराणसी और जयपुर जैसे शहरों ने, दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म और बढ़े हवाई किराए के बावजूद विदेशी शैलानियों को खूब आकर्षित किया है।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर (आईएटीओ) के कार्यकारी निदेशक गौर कांजीलाल ने बताया, विदेशी शैलानी दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म और बढ़े हवाई किराए के माहौल के बावजूद मथुरा, वृंदावन, वाराणसी और जयपुर में स्थानीय लोगों के साथ होली खेलना चाह रहे हैं। पिंक विबग्योर के ऑपरेटर रजत सिंगला के अनुसार विदेशी शैलानियों पर सबसे ज्यादा जादू भारत से उनके सांस्कृतिक रिश्ते का चलता है।

सिंगला ने बताया, वे लोग होली समारोह में उत्साह से हिस्सा लेना चाहते हैं, इसलिए हम उन्हें सफेद कुर्ता और प्राकृतिक रंग मुहैया कराते हैं। कांजीलाल कहते हैं कि जो लोग सही मायने में होली में रुचि रखते हैं वे उत्तर प्रदेश में अलग-अलग प्रकार की होली का आनंद लेना चाहते हैं। वे मथुरा के पास स्थित बरसाना की लट्ठमार होली में शिरकत करना चाहते हैं।
आतिथ्य ट्रैवेल्स के मनुज त्रिपाठी हालांकि इससे सहमत नहीं है। उन्होंन बताया, विदेशी शैलानी होली के दौरान बखेड़ा से बचने के लिए गलियों में जाने से कतराते हैं। वे लोग होटल में ही होली खेलना पसंद करते हैं। कांजीलाल ने कहा कि उत्तर भारत होली समारोह का केंद्र है। पश्चिमी भारत में जयपुर का हाथी उत्सव शैलानियों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसमें हाथियों पर चित्रकारी कर उनकी शोभायात्रा निकाली जाती है। देश पहले उपभोक्ता यात्रा समाचार पत्र 'लेट्स ट्रैवल' के अनुसार गोवा अपने अंदाज में होली को 'सिंगमोत्सव' के रूप में मनाता है। यह राज्य के हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है, जो 14 दिनों तक चलता है। (आईएएनएस)












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