बस्तर: यहां 525 वर्षो से खेली जा रही सूखी होली
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग में सूखी होली खेलने की परंपरा कोई आज की नहीं, बल्कि लगभग 525 साल पुरानी है। बेहद कम साक्षर माने जाने वाले गांव माडपाल ने न सिर्फ प्रदेश में बल्कि पूरे देश में सूखी होली खेलने का बेहतर संदेश दिया है। बस्तर का हृदय कहे जाने वाले जगदलपुर से महज 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है माडपाल गांव, जहां के ग्रामीण आज भी राजसी तरीके से होली का त्योहार मनाते हैं।
होली स्पेशल- नेताओं की पोल खोली है
फर्क सिर्फ इतना है कि यहां ग्रामीणों का राजा ही होलिका दहन करता है। राजा के दर्शन करने के लिए आसपास के गांव के लोग बड़ी संख्या में इस अवसर पर जुटते हैं। गांव में मेले जैसा माहौल रहता है। हर वर्ष होलिका दहन की रात राजवंश का कोई सदस्य इस गांव में आता है। यहां के ग्रामीण उन्हें उत्साहपूर्वक बनाए गए लकड़ी के रथ पर बैठाकर पारंपरिक ढंग से होलिका-दहन स्थल तक नाचते गाते हुए ले जाते हैं। गांव में स्थित मावली मंदिर के समीप ही होली खोदरा में राजा होलिका दहन करता है। इसके बाद यहां शुरू होता है नाट, जिसका आनंद ग्रामीण लेते हैं।
नाट दरअसल अंचल की प्रसिद्ध लोक नाट्य विधा है। इसमें ग्रामीणों द्वारा पुरातन वेशभूषा में महाभारत व रामायण के अलग-अलग प्रसंगों की प्रस्तुति दी जाती है। नाट में कलाकार केवल चेहरे की भावभंगिमा ही प्रस्तुत करते हैं, जबकि नाट गुरु पर्दे के पीछे से नाट में दिखाए जा रहे कहानी का विवरण पेश करते हैं।
संवाद हिंदी की बजाय वहां की स्थानीय भाषा हल्बी, भतरी और उड़िया में होते हैं। इसको देखकर ग्रामीण एक ओर जहां अपनी पुरातन धार्मिक संस्कृति से जुड़े रहते हैं वहीं उनका भरपूर मनोरंजन भी होता है।
अंचल में स्थित नानगुर नाम की जगह में नाट का विशेष आयोजन भी होता है। यहां पड़ोसी राज्य उड़ीसा से नाट्य कलाकार नाट प्रस्तुत करने आते हैं। कलाकारों के समूह जिन्हें नाट दल कहा जाता है उनमें नाट को लेकर खासा उत्साह होता है। नाट देखने के लिए पड़ोसी राज्य की सीमा से सटे दर्जनों गांव के लोग केवल माडपाल में नाट होली देखने और खेलने आते हैं। यहां होली का खुमार देखते ही बनता है।
यहां होली का उत्सव तो मनाया जाता है पर वर्तमान में मनाए जाने वाले होली की तरह न होकर नाट के रंगों में रंग जाता है। यहां न तो एक भी बूंद पानी की बबार्दी होती है न ही रंग और गुलाल के गुबार उड़ते हैं, यहां की सूखी होली अपने अनूठे अंदाज के लिए सर्वप्रसिद्ध है। यह लोगों को सीख भी देता है कि होली में हरियाली और पानी की बबार्दी बिल्कुल भी न करें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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