कर्नाटक की चुनावी रणभूमि में येदी की वेदी पर कौन?

[कन्‍हैया कोष्‍टी] येदी की वेदी तैयार है और इस वेदी में पड़ने वाली आहुति से उठने वाला धुआँ दिल्ली की हवा में भी घुलना तय है। येदी की यह वेदी सजी तो देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक राज्य में, परंतु यह वेदी देश भर में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चित राजनीति के दो चेहरों की परीक्षा भी बनने वाली है। आप समझ ही गए होंगे कि यहाँ येदी कौन है और वेदी क्या है? जी हाँ। यहाँ येदी है बी. एस. येदीयुरप्पा, तो वेदी है कर्नाटक विधानसभा चुनाव, जो आगामी 5 मई को होने वाले हैं।

दक्षिण भारत के एक प्रमुख राज्य कर्नाटक में यह चुनाव ऐसे समय पर होने जा रहे हैं, जब देश में 14 माह बाद होने वाले लोकसभा चुनावों की हवा बह रही है। इस हवा में सबसे ज्यादा चर्चा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की है। हालाँकि लोकप्रियता के मामले में मोदी राहुल से कहीं आगे हैं। एक तरफ राहुल गांधी को कांग्रेस उपाध्यक्ष बना कर लोकसभा चुनाव 2014 की कमान प्रत्यक्ष रूप से सौंपी जा चुकी है, तो दूसरी तरफ लोकप्रियता के घोड़े पर सवार नरेन्द्र मोदी के बारे में भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि उन्हें लोकसभा चुनाव 2014 में एक बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।

वैसे राहुल गांधी का नाम आते ही जिस तरह कांग्रेस की संभावित सरकार में उन्हें केवल प्रधानमंत्री पद पर देखा जाता है, उसी तरह नरेन्द्र मोदी का नाम आते ही उनके समर्थक सीधे भाजपा की सरकार बनते देखते हैं और प्रधानमंत्री के रूप में मोदी को देखना चाहते हैं। इस प्रकार देश में इस समय सबसे चर्चित दो नाम हैं राहुल गांधी और नरेन्द्र मोदी। इनके समर्थकों की नजर में सीधे 2014 जरूर होगा, लेकिन राजनीतिक धरातल पर देखा जाए, तो अभी राहुल-मोदी को कई परीक्षाओं से गुजरना बाकी है और पहली परीक्षा येदी की वेदी के रूप में तैयार है।

येदी यानी बी. एस. येदीयुरप्पा, जो कर्नाटक की राजनीति का बड़ा नाम हैं। पाँच साल पहले उनके नेतृत्व में दक्षिण भारत में पहली बार सत्ता हासिल करने वाली भाजपा आज उन्हीं के कारण संकट में पड़ गई है। आज येदी भाजपा में नहीं हैं। वे अलग पार्टी बना चुके हैं और उनका राज्य में क्या प्रभाव है, इसका जवाब हालिया स्थानीय निकाय चुनावों से मिल गया है, जिसमें भाजपा तीसरे स्थान पर खिसक गई है। इन परिणामों से भाजपा को अंदाजा आ गया होगा कि विधानसभा चुनावों की डगर उसके लिए कितनी कठिन है।

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी भी कर्नाटक में दस वर्षों से सत्ता से दूर है। एस. एम. कृष्णा के नेतृत्व में 2004 तक कांग्रेस का वहां विशुद्ध शासन था। उसके बाद राजनीतिक अस्थिरता एवं गठबंधनों के बीच धर्म सिंह, एच. डी. कुमारस्वामी और फिर 2007 में येदीयुरप्पा, फिर डी. एस. सदानंद गौडा और जगदीश शेट्टर मुख्यमंत्री बने, लेकिन कांग्रेस के लिए विशुद्ध सत्ता का इंतजार लम्बा होता चला गया।

कर्नाटक के ये हालात कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए अच्छे नहीं हैं। येदीयुरप्पा जहाँ भाजपा को नुकसान पहुँचा चुके हैं और विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगाएँगे। अब बात येदी की वेदी पर राहुल-मोदी की परीक्षा की करते हैं। दरअसल कांग्रेस उपाध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी के सामने यह पहला चुनाव होगा। यही कारण है कि येदी की इस वेदी पर राहुल गांधी की परीक्षा जहाँ भाजपा को होने वाले नुकसान को अपने फायदे में तब्दील करना होगी।

दूसरी तरफ लोकप्रियता के मामले में देश में सबसे आगे नरेन्द्र मोदी को भले ही भाजपा की ओर से अभी अधिकृत रूप से कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई हो, परंतु भाजपा यदि चाहे तो उन्हें कर्नाटक में उतार कर उनकी लोकप्रियता भुना सकती है। यदि भाजपा ऐसा कोई कदम उठाती है, तो निश्चित रूप से यह नरेन्द्र मोदी के लिए येदी की वेदी पर भाजपा को होने वाले नुकसान को रोकने की परीक्षा के समान होगा। अब देखना यह है कि कर्नाटक का ऊँट किस करवट बैठता है?

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+