अखिलेश राज में अपराध और महिलाओं पर जुल्म रिकार्ड बने: भाजपा

उन्होंने कहा कि सरकार ने एक साल तो बयानबाजी में गुजार दिये अब तो कुछ कर के दिखाएं। राज्य की बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर कल मुख्यमंत्री द्वारा की जा रही समीक्षा बैठक पर प्रश्न खड़े करते हुए कहा कि नौ माह बाद सूबे के मुखिया को प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली की समीक्षा करने की फिर याद आयी।
सरकार गठन के बाद 18 मई 2012 को राज्य की कानून व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री ने 20 दिनों में अपराध नियंत्रण की चेतावनी दी थी पर नतीजा सामने है कानून व्यवस्था के लिए समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता ही चुनौती बन रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि जहां दंगा होगा वहां के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक जिम्मेदार होंगें। क्या हुआ वह खुद ही समीक्षा कर लें कि उनके इस आदेश का कितना अनुपालन हो पाया है।
श्री पाठक ने कहा कि सपा सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में 34 दंगे हुए, बेतहाशा अपराध बढ़े और तो और पुलिसकर्मियों पर भी सपाई कहर बनकर टूटते रहे। लेकिन मुख्यमंत्री ने हर बार कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया और जब कार्रवाई की तो एक समान तरह के प्रकरण पर लखनऊ और इलाहाबाद में अलग-अलग कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि सरकार के गठन को एक वर्ष पूर्ण हो चुके है। मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था की बैठक करने जा रहे हैं अच्छा होता कि वह कानून व्यवस्था की चुनौती बन रहे सपाई कार्यकर्ताओं पर अंकुश लगाने और पुलिस का इकबाल कैसे बना रहे इसकी भी समीक्षा करते।












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