राम सिंह की मौत, तिहाड़ में सवाल मचाये चिहाड़
नयी दिल्ली। दिल्ली गैंगरेप के मुख्य आरोपी राम सिंह तिहाड़ जेल में आत्महत्या करने के बाद तिहाड़ जेल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। देश के सबसे बड़े और सबसे सुरक्षित जेल में अगर कोई कैदी अपने बैरक में इस तरह की घटना को अंजाम देते है तो सवाल उठने वाजिब है। एक हाई वाल्टेज केस का मुख्य आरोपी जेल फांसी लगा लेता है और किसी को कानों-कान खबर तक नहीं होती ये बात लोगों के गले से उतर नहीं रही है।
ऐसे में तो सिर्फ एक ही बात सामने आती है कि अगर राम सिंह ने खुदकुशी की है तो चूक तिहाड़ जेल प्रशासन की ओर से हुई है। अगर आकड़ों की बात करे तो केवल इस साल तिहाड़ जेल के अंदर 18 मौते हो चुकी है। जिसमें से 2 कैदियों ने इसी तरह से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। तिहाड़ जेल के अंदर तीन चक्रिय सुरक्षा व्यवस्था तैनात होती है।

निगरानी और बाहरी सुरक्षा आईटीबीपी और सीआरपीएफ जवानों के साथ-साथ तमिलनाडु के स्पेशल पुलिस बल के हाथों में होती है। इनका काम तेहाड़ जेल के अलग-अलग द्वारों और जेल आने वाले लोगों की निगरानी करना होता है। जबकि जेल ऑपरेशन दिल्ली कारागार के कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। तिहाड़ की सुरक्षा देश भर में चर्चा का विषय रहा है। इस थ्री-लेयर सुरक्षा में बाहर का एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता। ऐसे में गैंगरेप के आरोपी की खुदकुशी सवालों के घेरे में है।
तिहाड़ जेल सूत्रों की माने तो 6 जनवरी को जेल प्रशासन ने राम सिंह सहित जेलों में बंद गैंगरेप के आरोपियों द्वारा खुदकुशी किए जाने की आशंका जताई गई थी। कैदियों के मुताबिक फांसी की सजा से डरे इन आरोपियों ने साथी कैदियों से बातचीत करना बंद कर दिया था। इस बात की जानकारी मिलने के बाद किसी प्रकार की अनहोनी की घटना को रोकने के लिए तिहाड़ में उन कैदियों को सुसाइडल वॉच पर रखा गया था। यह एक तरह का अलर्ट है, जिसके तहत डिप्रेशन में गए कैदियों पर 24 घंटे नजर रखी जाती है, ताकि वे किसी तरह से खुद को नुकसान नहीं पहुंचा सके। बलात्कार जैसे मामलों में जेल में कैद कैदियों को जेल के अंदर भी हीन भावना का सामना करना पड़ता है। दूसरे कैदी उनके बारे में जानकर उनसे दूरी बनाएं रखते है।
ऐसे में कैदी की मनोदशा और बिगड़ जाती है। जेल नियम कहता है कि अगर कैदी डिप्रेशन का शिकार हो रहा है तो उसे मनोवैज्ञानिक सलाह मुहैया कराई जाती है। राम सिंह मामले में इन नियमों का पालन हुआ या नहीं ये जांच रिर्पोट में ही सामने आ पाएगा। गैंगरेप के आरोपियों की मनोवृति को देखते हुए उनपर नजर रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनात किए जाने के अलावा वार्डन को भी सतर्क किया गया था। जेल के नियमों के मुताबिक अगर किसी कैदी में इस तरह की मनोदशा देखी जाती है तो उसे 24 घंटे की निगरानी मुहैया कराई जाती है। उसपर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते है।
लेकिन राम सिंह के मामले में ऐसा हुआ कि नहीं ये जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल राम सिंह की मौत ने तिहाड़ जेल प्रसासन के लिए मुसिबतें बढ़ा दी है। गृह मंत्रायल ने भी इस घटना के लिए तिहाड़ जेल को फटकार लगाई है और जांच के आदेश दिए है, लेकिन राम सिंह की मौत से जो सवाल उठ खड़े हुए है उसका जबाव शायद जांच के बाद ही मिल पाएगा।
राम सिंह की मौत पर तिहाड़ जेल पर उठे सवाल
राम सिंह के आत्महत्या करने के दौरान कहां था जेल स्टाफ?
क्या राम सिंह सुसाइड टेंडेंसी वाला कैदी था?
अगर ऐसा था तो उसे सुसाइड वॉच पर क्यों नहीं रखा गया?
क्या राम सिंह के सेल में सीसीटीवी लगा था?
सुसाइड टेंडेंसी वाले कैदियों के लिए क्या जेल में मनोचिकित्सक मौजूद हैं?
मदद बस एक कॉल दूर
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