परमाणु कानून पर जापान मांग रहा है भारत से सलाह
नयी दिल्ली। पिछले साल जापान के फुकुशिमा परमाणु हादसे के लिए जिम्मेदार अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी के मुआवजे से इंकार करने के बाद जापान की सरकार परमाणु काननू में संशोधन करने का मन बना रही है। इसके लिए जापान की शिंजो आबे सरकार भारत के अनुभव से लाभ उठाने के लिए उसके सलाहकारों से राय मशवरा कर रही है।

जापान की संसद डायट के परिसर में इस माह की शुरूआत में आयोजित बैठक में उच्चतम न्यायालय के वकील विकास मोहंती ने जापानी सांसदों और कानूनविदों तथा बुद्धजीवियों को देश के परमाणु कानून के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। श्री मोहंती ने कहा कि परमाणु संयंत्र आपूर्तिकर्ताओं पर सुरक्षा की जिम्मेदारी डालकर हमने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुनाफे और देश की जनता के गरिमापूर्ण जीवन के मानवाधिकारों के बीच संतुलन स्थापित किया है।
इस कानून के बाद जापान को भी भारत का अनुकरण करके हादसों के लिए परमाणु कंपनियों को पूरी तरह जवाबदेह बनाना चाहिए और अपनी जनता के हितों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुनाफे से ऊपर रखना चाहिए। वर्ष 2011 में सुनामी के बाद पुकुशिमा हादसे के बाद चेती जापान सरकार की ओर से आगामी अगस्त में परमाणु कानून में संशोधन का प्रस्ताव है।
जापान के संसदीय आयोग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पुकुशिमा हादसा सुनामी नहीं बल्कि बहुराष्ट्रीय परमाणु कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के गडबड परमाणु संयंत्र की वजह से हुआ लेकिन जनरल इलेक्ट्रिक ने परमाणु कानून की धरा पांच के उस र्पांवधन की आड लेकर मुआवजा देने से पल्ला झाड लिया जिसमें इन हादसों के लिए आपूर्तिकर्ताओं की बजाय संचालक कंपनी को जिम्मेदार बनाया गया है।












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