कुपोषण से लड़ने में कौन सा राज्य सबसे तेज? गुजरात

रिपोर्ट में सीएजी ने कहा कि छह राज्यों की वजह से देश का औसत गिर कर 41.16 फीसदी हुआ है। वो छह राज्य हैं- गुजरात (जहां औसत 71 से गिरकर 39 हो गया), कर्नाटक (45 फीसदी से गिरकर 23 फीसदी हुआ), महाराष्ट्र (45 से गिरकर 23 हुआ), उत्तर प्रदेश (53 से गिरकर 41 हुआ), उत्तराखंड (46 से गिरकर 25 हुआ) और पश्चिम बंगाल (53 से गिरकर 37 फीसदी हुआ) हैं। यह तुलना 2007 और 2011 से की गई है।
लेकिन अगर आप यह सोच रहे हैं कि गुजरात में कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे कम है, तो भी आप गलत हैं। क्योंकि उससे बेहतर स्थिति महाराष्ट्र की है, जहां 77 फीसदी बच्चे कुपोषित नहीं हैं। वहीं मध्य प्रदेश में 72 और उत्तराखंड में 75 फीसदी बच्चे स्वस्थ्य एवं हष्टपुष्ट हैं।
वहीं गुजरात से पीछे चल रहे राज्यों में मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश में 49 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं, जबकि बिहार में 82 फीसदी, हरियाणा में 43 फीसदी, राजस्थान में 43 फीसदी और दिल्ली में 50 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं।
गुजरात में जिस गति से कुपोषण पर अब तक की जीत हासिल की गई है, उसके लिये नरेंद्र मोदी की सरकार को श्रेय जाता है। लेकिन जंग अभी जारी है, लिहाजा यह कहना कि जो राज्य ज्यादा विकसित है, वहां कुपोषण कम है, गलत होगा। असली विकास तो तब होगा जब पूरे देश में कुपोषण पोलियो की तरह खत्म हो जायेगा।












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