शर्मीला पर आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज

अब इस मामले में 22 मई को सुनवाई होगी। इससे पहले मुकदमे की सुनवाई के लिए इरोम रविवार को ही मणिपुर से दिल्ली पहुंच गई थीं। पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान बड़ी संख्या में इरोम के समर्थकों ने कोर्ट परिसर के बाहर नारेबाजी की। समर्थको की भीड़ को देखते पुलिस ने भारी सुरक्षा इंतजाम कर रखे थे। पेशी के दौरान महानगर दंडाधिकारी आकाश जैन के सामने मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम ने कहा कि वो जानबूझकर आत्महत्या नहीं करना चाहती थीं। वह तो जीना चाहती हैं। उन्हें जिंदगी से प्यार है लेकिन वह शांति और न्याय चाहती हैं। लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को बेबुनियाद बतेते हुए कहा कि वह आत्महत्या की कोशिश की आरोपी हैं। उनके खिलाफ आरोप साबित होता है। कोर्ट ने कहा कि अदालत उनका सम्मान करती है लेकिन कानून आपको उन्हें उनकी जिंदगी को खत्म करने की इजाजत नहीं देता है।
कोर्ट ने उन्हें अदालती कार्रवाई को समझने के लिए कुछ और मोहलत दी है। अदालती कार्रवाई के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम ने अदालत से कहा कि सरकार अफस्पा को हटा देती है तभी वह खाना खाएंगी और फूड पाइप को फेंक देंगी। गौरतलब है कि इरोम चानू शर्मिला अफस्पा को हटाने की मांग को लेकर साल 2000 से भूख हड़ताल कर रही हैं। उन्होंने 2000 में असम राइफल्स के साथ कथित मुठभेड़ में दस लोगों की मौत के बाद भूख हड़ताल शुरू की थी। वह पूर्वोत्तर राज्यों से अफस्पा को हटाने की मांग कर रही हैं। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं जहां उन्हें नाक के जरिये जबरन भोजन दिया जा रहा है।
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