अदालत रही सख्त तो दर-दर भटकेंगे परवेज मुशर्रफ

यानी उन्हें यहां आने के बाद खुद के बंगले में रहने को नहीं मिलेगा। अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के घरों में रात गुजारनी पड़ सकती है। यही नहीं अगर इस्लामाबाद पुलिस ने उनके वॉरंट को रिन्यू करा लिया तो अदालत की अवमानना करने के मामले पर उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है।
मुशर्रफ ने कहा कि जल्द ही देश में चुनाव होने वाले हैं, तो वो देश को एक अच्छी सरकार देना चाहते हैं। लेकिन सरकार वो कहां से देंगे, जब पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी अदालत ने शनिवार को उनकी जब्त संपत्ति और बैंक खातों को जब्ती मुक्त करने संबंधी याचिका ठुकरा ही दिया है। असल में उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या मामले में अदालत में हाजिर होने के लिये कहा गया था, लेकिन वो देश से बाहर हैं।
यही कारण है कि मुशर्रफ की संपत्ति कुर्क कर ली गई और और उनके बैंक खातों को 'फ्रीज' कर दिया गया। अदालत ने पूर्व सैन्य तानाशाह को 2007 में हुए भुट्टो हत्याकांड मामले में भगोड़ा घोषित किया था। कई नोटिस आये, गिरफ्तारी वारंट आये, लेकिन वो अपना पक्ष रखने अदालत नहीं पहुंचे। फेडरल जांच एजेंसी (एफआईए) ने भी मुशर्रफ को समन भेजने का आग्रह किया था, जिस पर मुशर्रफ ने बेनजीर हत्या मामले में सहयोग का आग्रह ठुकरा दिया।
अब जब मुशर्रफ ने वतन लौटने की इच्छा जताई तो उनकी पत्नी सेहबा मुशर्रफ ने संपत्ति की जब्ती से मुक्त कराने के लिये याचिका दायर की, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। अर्जी में दलील दी गई कि इस्लामाबाद में एक मकान उनके शौहर ने उन्हें उपहार में दिया था और वह उनके नाम है और बैंक खाता बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए एक ट्रस्ट के नाम पंजीकृत है।












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