चुनाव के मद्देनजर अफजल को फांसी नहीं: मनीष तिवारी

दरअसल 21 जनवरी को गृहमंत्रालय ने राष्ट्रपति को अफजल गुरु की दया याचिका भेजी थी। जिसके बाद 3 फरवरी को राष्ट्रपति ने उसे ठुकरा दिया था। राष्ट्रपति के दया याचि का को ठुकराने के बाद 4 फरवरी को गृहमंत्रायल ने संसद हमले के मुख्य आरोपी अफजल गुरु के खिलाफ डेथ वारेंट जारी किया था। कोर्ट के आदेश के बाद उसे फांसी दे दी गई।
अफजल गुरु फांसी दिए जाने के बाद परिवार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें इससे संबंधित जानकारी नहीं दी गई थी। तो वही सरकार की ओर से अपने रुख साफ करने सामने आए सूचना प्रासर मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि अफजल को राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर फांसी दी गई है। अफजल गुरु के भाई ने सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार ने चुनावों को देखते हुए अफलज को इस वक्त फंसी ही है । सरकार ने इइस बात का भी खंडन करते हुए बताया कि अफजल गुरु की फांसी का फैसला 4 फरवरी को ही हो गया था। उन्होंने कहा कि देश में कानून का राज है और देश पर हमला करने वालों को बख्सा नहीं जाएगा। फांसी को गोपनीय रखे जाने की बात पर जबाव देते हुए उन्हेंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए इसे गोपनीय रखा गया। वही बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी शिवसेना ने राष्ट्रपति को इसके लिए बधाई दी है जबकि केन्द्र सरकार की निंदा करते हुए कहा है कि सरकार ने अफजल को फांसी देने में लम्बा वक्त लगाया है।












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