दिल्ली जाने से पहले नरेंद्र मोदी ने गिनायीं उपलब्धियां

मोदी ने अपने ब्लॉग पर लिखा, "कुछ दिन पहले अहमदाबाद में साबरमती के तट पर जब मैंने अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन किया, तो वहां मैंने अलग-अलग देशों की सांस्कृतियों को मिलते हुए देखा। कुछ साल पहले उसी जगह की तस्वीर एकदम उलट थी। वहां जाने पर मेरी वो यादें ताज़ा हो गईं, जब सब साबरमती में सब कुछ था, सिवाये पानी के। यहां तक शहर के बच्चे व युवा नदी पर क्रिकेट तक खेल सकते थे।"
पिछले कुछ सालों में, साबरमती और उसके आस-पास के इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज साल भर तक न केवल नदी में पानी रहता है, बल्कि उसके चारों ओर के इलाके की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और लोगों को आकर्षित करती है। साबरमती के किनारे हुए इस बदलाव के बारे में कई पर्यटकों ने भी मुझे बधाई दी और सरकार के इस काम की सराहना की। क्योंकि यह सबसे इन्नोवेटिव प्रोजेक्ट में से एक है।
बात सिर्फ यहीं तक आकर नहीं रुक जाती है। इसके साथ-साथ गुजरात को मिला है विश्वस्तरीय शहरीकरण। गुजरात सबसे अधिक शहरीकृत राज्यों में से एक है। यहां की 42 फीसदी जनसंख्या शहरों में रहती है। जबकि दस साल पहले यह संख्या 35.8 प्रतिशत थी। तेजी से हुए शहरी करण के सामने कई प्रकार की चुनौतियां थीं। यातायात व्यवस्था से लेकर इमारतों, सड़कों, फ्लाईओवर, आदि का निर्माण। मुझे खुशी है कि गुजरात ने यह कर दिखाया।
अगर गुजरात के शहरी विकास की बात करें तो जिस समय मैं मुख्यमंत्री बना था तब शहरी विकास पर 200 करोड़ रुपए खर्च होते थे। आज 5670 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इसके चलते यहां के शहरी विकास ने 25 गुना बढ़ोत्तरी हासिल की है। इसके अलावा राज्य में एक से एक बेहतरीन फ्लाईओवर, सड़कें, आदि इस बात की गवाह हैं कि सरकार का मकसद सिर्फ एक है। विकास के साथ रोजगार। यही कारण है कि तमाम कंपनियां यहां आ रही हैं।












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