अब नया विश्वरूपम तैयार करे तमिलनाडु
कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम पर प्रतिबंध लगाये जाने के पीदे तमाम बातें बतायी जा रही हैं। लोग कहते हैं कि फिल्म में विशेष धर्म का अपमान किया गया है, तो सरकार कहती है इतनी सुरक्षा कहां से लायें। असली सत्य के लिये तथ्यों और यथार्थ को अलग करना काफी मुश्किल कार्य हो सकता है।
देश में जहां हम अब कम उदार होते जा रहे हैं, वहां एक और बात उभर कर आयी है। हाल ही में कई अभिनेताओं, लेखकों और कई अन्य लोगों से संबंधित विवाद हुए और उन्हें उनकी सवाल पूछने व आलोचना करने की स्वतंत्रता को लेकर लक्ष्य बनाया गया। सच पूछिए तो धर्मनिरपेक्ष विचारधारा रखने वाले एक लोकतांत्रिक देश के लिये यह अपशगुन है।

इस मामले में तमिलनाडु कई सालों से सवालों के घेरे में रहा है, जहां लोग चापलूसी के मार्ग पर ज्यादा चलते हैं। राजनीतिक इच्छाओं को पूरा करने के लिये कई बार फिल्म उद्योग का सहारा लिया गया। कई सफल और कम सफल फिल्म अभिनेता राजनेता बन गये और यहां तक राज्य के मुख्यमंत्री भी, जो शायद उनके करियर का सबसे बड़ा पड़ाव भी बना। उन सभी के रिश्तेदार कंपनियों के सीईओ बन गये। 1960 के दशक के बाद दो पार्टियां उभरीं- डीएमके और एआईएडीएमके, जिनमें कॉलीवुड के हीरो, विलेन, व अन्य फिल्मी कैरेक्टर, कॉमेडियन भरे पड़े हैं, जिनकी तमिलनाडु फिल्म इंडस्ट्री में पहचान है।
जब पार्टी सत्ता में रही तो इन लोगों को भारी फायदा हुआ और जब हारी या फिर विपक्ष में बैठे तो वही सबसे बड़े शिकार बने। इस राज्य में राजनीति और फिल्म उद्योग के संबंधों एक जटिल मकड़जाल है। यह एक मकड़जाल ही नहीं, बल्कि यहां तो सत्ता में बैठे फिल्म अभिनेताओं व नेताओं द्वारा कई लोगों का शिकार हुआ। ऐसा पहले भी हुआ, आज भी हो रहा है और आगे भी होता रहेगा। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कमल हासन जैसे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता नये शिकार होंगे।
मैं बताना चाहूंगा कि मैं कमल हासन का फैन नहीं हूं। मेरे हिसाब से उन्होंने एक "अलग तरह" की फिल्में बनाने के प्रयास किये, कुछ को सफलता मिली तो कुछ विफल हुईं। इसी प्रकार उन्होंने फिल्म उद्योग ने कई भूमिकाएं निभाईं- अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, गायक, आदि और ऐक्टिंग में बेस्ट। आमिर खान से कहीं पहले कमल ने रचनात्मक प्रस्तुतियां दीं। अब कुछ सालों से फैन्स भी उनसे कुछ अलग देने की उम्मीद करते हैं। मुझे नहीं लगता कि तमिलनाडु फिल्म इंडस्ट्री में कोई अन्य अभिनेता होगा जो कमल को चुनौती दे सके। ऐसे बड़े नायक को झुकना पड़ा, उस चीज के लिये जो उन्होंने नहीं की। वे फिल्म पर करीब 100 करोड़ रुपए लगा चुके हैं। उन्होंने अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी है। उनके कई साथी तो उन्हें सार्वजनिक रूप से समर्थन देने से भी पीछे हट गये हैं, उन्हें डर है कि कहीं अगले टार्गेट वो न बन जायें।
करीब एक दशक पहले ईवी रामासामी (जो पेरियार के नाम से प्रसिद्ध हुए) ने सेल्फ रिस्पेक्ट मूवमेंट शुरू किया। उनका उद्देश्य था उन जगहों पर एकरूपता लाना, जहां पिछड़ी जातियों के लिये बराबर के अधिकार हैं। तमिलनाडु का इतिहास गवाह है कि उस मूवमेंट ने मॉडर्न पॉलिटिक्स की दिशा तय की। तमिलनाडु के लोगों के लिये यह एक और अवसर है, जब सरकार और राजनीतिक सिस्टम के खिलाफ नया आंदोलन खड़ा कर सकते हैं। यह समय है राज्य के नागरिकों के लिये कि वो उस रिस्पेक्ट को समझें, जो उन्हें मिलनी चाहिये। यह समय है तमिलनाडु के लिये एक ऐसा आंदोलन खड़ा करने की, जिससे बाकी के भारत को कुछ सीखने को मिले।
लेखक परिचय- राधा कृष्ण्णन, बेंगलूरु के कम्युनिकेशन प्रोफेशनल हैं।












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