पाकिस्तानी सेना में आज भी जिंदा हैं 'हेड हंटर्स'
नयी दिल्ली (अंकुर कुमार श्रीवास्तव)। 19वीं सदी में कबीलों की लड़ाई में अपने दुश्मन के सिर को ट्रॉफी समझकर ले जाने वाले ''हेड हंटर्स'' आज भी पाकिस्तान सेना में जिंदा है। नियम, कानून, इंसानियत में विश्वास रखने वाली भारतीय सेना से ठीक विपरीत पाकिस्तानी सेना एक बार नहीं बल्कि कई बार ऐसी दरिंदगी का परिचय दे चुकी है। सीधे शब्दों में कहें तो दोस्ती की पीठ पर दरिंदगी का खंजर घोपना पाकिस्तान की पुरानी आदत है।
1999 के कारगिल युद्ध को ही देख लीजिए। इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना के जवानों ने ठीक इसी हालत में सेना की सोलह कोर के क्षेत्राधिकार में नियंत्रण रेखा पार कर कुछ जवानों पर घात लगाकर हमला किया था। पाकिस्तानी सेना के जवान उनके सिर भी काट ले गये थे। बात अगर पिछले 12 वर्षों की करें तो सिर काट कर ले जाने की यह दूसरी घटना है।

वहीं कारगील युद्ध के दौरान कैप्टन सौरभ कालिया के शरीर को क्षत विक्षत करने वाली पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा पर भी भारतीय सेना के कुछ जवानों को यातनाएं देकर मारा था। ऐसे अन्य कई मामले भी हैं जो समाचारों की सुर्खियां नहीं बने। मगर जो बात सोचने वाली है वो ये है कि पाकिस्तान के परोक्ष युद्ध के दौरान ऐसी वारदातें हमारे सेना के सूरवीरों को आहत कर रही हैं जो जान की परवाह किये बिना बॉर्डर पर लड़ रहे हैं।
सेना के उच्चाधिकारियों की मानें तो हमारे सैनिकों में आमने-सामने की लड़ाई में मरना या मारना फक्र की बात होती है मगर गला काट कर ले जाना हैवानियत है। सवाल यह भी कि पाकिस्तानी आतंकवाद का सामना कर रही भारतीय जवानों से जब इस तरह की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई होती है तो उस समय मानवाधिकारसंगठन चुप क्यों रहते हैं?
पाकिस्तान के बलूच रेजिमेंट के पास 30 अफगानी आतंकी
मेंढर के मनकोट सेक्टर के सामने तैनात पाक की 29 बलूच रेजिमेंट ने अपने साथ करीब 30 अफगानी आतंकी रखे हैं। ये दहशतगर्द गला रेतने एवं आइईडी फिट करने में खासी महारत रखते हैं और इनकी कमान जुबेर अहमद बलूच नामक युवक कर रहा है। पाक सेना के साथ इन अफगानी आतंकियों ने मिलकर इस घटना को अंजाम दिया है। सूत्रों की मानें तो बलूच रेजिमेंट के साथ 30 अफगानी आतंकवादी वॉलंटियर के तौर पर कार्य कर रहे हैं।
मंगलवार को पाक सेना के जवानों के साथ अफगानी आतंकी भी भारतीय सीमा में घुसे थे और दो जवानों की गला रेत कर हत्या कर दी। एक जवान का सिर भी यह अपने साथ ले गए हैं। इससे इस बात को बल मिलता है कि सीमा पर पाक सेना के साथ अफगानी आतंकी भी काम कर रहे हैं। अगर यह अफगानी सीमा पर मारे जाते हैं तो इन्हें आतंकी घोषित कर दिया जाएगा अगर बच जाते हैं तो पाक सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे।












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