अखिलेश सरकार पर मायावती के आरोप जायज़

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में अपराध के लिये समाजवादी पार्टी को जिम्‍मेदार बताते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्‍यपाल बीएल जोशी से यूपी सरकार को तुरंत बर्खास्‍त कर प्रदेश में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग कर डाली। सच पूछिए तो मायावती की राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग जायज़ भी है, क्‍योंकि सपा सरकार में अधिकारियों से लेकर आम कर्मचारी तक सभी बेलगाम हैं।

मायावती का कहना है कि यूपी वालों के लिये सपा सरकार में जीना अब बर्दाश्‍त के बाहर हो गया है। उन्‍होंने कहा कि लूट, डकैती, अपहरण, हत्या, आदि के साथ बलात्‍कार की वारदातें लगातार बढ़ रही हैं। सपा सरकार अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। अब अगर मायावती की इन बातों पर गौर करते हुए यूपी में राष्‍ट्रपति शासन लगा भी दिया जाये तो क्‍या होगा, जब पुलिस वही है, अधिकारी वही हैं, सरकारी कर्मचारी वही हैं और जनता भी वही।

राष्‍ट्रपति शासन आने का सीधा मतलब चुनाव और इस समय यूपी में चुनाव की बात करना किसी मजाक से कम नहीं। यही कारण है कि मायावती की इस मांग को सपा नेताओं ने हंस कर टाल दिया। लेकिन सच मायने में यूपी में अपराधियों के हौंसले क्‍यों बुलंद हैं, यह जानने की जरूरत आज है। जरूरत इसलिये है, क्‍योंकि हमारी बेटियां इस समय खुद को सबसे जयादा असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

हम यहां बताने जा रहे हैं अखिलेश सरकार की 8 खामियां-

कमांडर नहीं टीपू हैं अखिलेश

कमांडर नहीं टीपू हैं अखिलेश

अखिलेश यादव की सरकार में मंत्रियों के बीच कोई खास तामलमेल नहीं है। किसी के अंदर मुख्‍यमंत्री का डर नहीं है, क्‍योंकि अधिकांश मंत्रियों के लिये अखिलेश बेटे समान हैं। यही कारण है कि आजम खां जैसे कई मंत्री, जो मुलायम के मित्रमंडली में हैं, वो अखिलेश को टीपू बुलाते हैं। यही कारण है, जब शिवापाल सिंह यादव जैसे मंत्री अपने अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं, तो कहते हैं चोरी करो, मगर इतनी नहीं कि जनता को ठेस पहुंचे। पढ़ें पूरा लेख।

कंट्रोल में नहीं युवा नेता

कंट्रोल में नहीं युवा नेता

सपा सरकार में युवा नेता जरा भी कंट्रोल में नहीं है। कारण यह है कि मुख्‍यमंत्र अलिखेश यादव उनके अखिलेश भईया हैं। जो कुछ भी होगा भईया देख लेंगे। यही सोच कर सपा नेता जब चलते हैं तो पुलिस तक कुछ नहीं बोलती। भले ही सपा के वाहनोंप र झंडे लगाने पर प्रतिबंध लगा हो, लेकिन स्‍टीकर चस्‍पा कर सपा की गाडि़यां हर इलाके में दिखाई देती हैं, जिन्‍हें रोकना किसी भी पुलिसवाले के लिये गुनाह से कम नहीं।

कमजोर पुलिस

कमजोर पुलिस

अखिलेश यादव ने सीएम बनते ही एंकाउंटर स्‍पेशियलिस्‍ट नवनीत सिकेरा को लखनऊ का डीआईजी बना दिया। वहीं जगमोहन यादव को प्रदेश का डीजीपी लॉ एंड ऑर्डर बना दिया। ऐसे तमाम तेज-तर्रार लोगों को महत्‍वपूर्ण स्‍थानों पर ले आये। यह सोचकर कि ये लोग अन्‍य अधिकारियों के साथ मिलकर प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था को दुरुस्‍त रखेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस इतनी कमजोर है कि आये दिन थानों में घुस कर लोग पुलिसवालों को पीट रहे हैं। ज्‍यादा दूर नहीं अभी तीन दिन पहले ही ताज़ा घटना लखनऊ के गोमीनगर में हुई, जहां पुलिसवालों को घुसकर पीटा गया।

सांप्रदायिक दंगे

सांप्रदायिक दंगे

उत्‍तर प्रदेश में पिदले पांच साल में इतने सांप्रदायिक दंगे नहीं हुए, जितने पिछले 9 महीनों में हो गये। सपा सरकार बनने के बाद से मेरठ, मेरठ, गोंडा, अयोध्‍या और बरेली ने सांप्रदायिक दंगे झेले। इन शहरों की जनता के मन में सरकार के प्रति खटास भर चुकी है। सांप्रदायिक दंगे होना तो बदहाल कानून व्‍यवस्‍था से कहीं ज्‍यादा बदतर है, क्‍योंकि ये दाग जल्‍दी धुलते नहीं हैं।

बदहाल ट्रैफिक

बदहाल ट्रैफिक

उत्‍तर प्रदेश में आज कोई भी शहर ऐसा नहीं है, जहां की ट्रैफिक व्‍यवस्‍था दुरुस्‍त हो। राजधानी लखनऊ को ही ले लीजिये। आप बिना हेलमेट पूरे शकर के चक्‍कर काट लेंगे, पुलिस आपको टच तक नहीं करेगी। पार्किंग की बात करें तो विधानसभा मार्ग जैसे महत्‍वपूर्ण रास्‍तों पर तीन-तीन लेन में लोग बिना अनुमति वाहन पार्क कर के चले जाते हैं, कोई गाड़ी को हाथ तक नहीं लगाता। पुलिस ने भी कहना बंद कर दिया है, क्‍योंकि जिन्‍हें पकड़ों उनमें से हर दूसरा व्‍यक्ति सपा से अपना रिश्‍ता निकाल लेता है।

थाने स्‍तर पर अभद्रता बढ़ी

थाने स्‍तर पर अभद्रता बढ़ी

किसी भी पुलिस थाने में अगर सीओ इटावा या मैनपुरी का है, तो वो एसएसपी तक की नहीं सुनता। वो मनमाने ढंग से थाने को चलाने की कोशिश में रहता है। यही नहीं सड़क किनारे पेट्रोलिंग कर रहे जिन पुलिसवालों का हाल-चाल एसपी को लेना चाहिये, उनका हालचाल सपा के नेता लेते हैं। बाकायदा गाड़ी रोक कर पूछते हैं दरोगा जी क्‍या हाल हैं, कोई दिक्‍कत हो तो बताना.... यही कारण है कि छोटी-छोटी बात पर थानों के अंदर अभद्रता के मामले इधर बढ़े हैं।

बिजली संकट

बिजली संकट

उत्‍तर प्रदेश में बिजली का संकट जस का तस बना हुआ है। मायावती सरकार में जो हाल था, वही हाल आज भी है। लखनऊ के अलावा कोई भी ऐसा शहर नहीं है, जिसे 24 घंटे बिजली मिलती हो। पीलीभीत के कई कस्‍बों में आलम यह है कि वहां जैनरेटर के अलावा बिजली के बारे में आप सोच भी नहीं सकते। अखिलेश ने अपने चुनावी घोषणापत्र में बिजली संकट को दूर करने का वादा किया था। यह संकट कब दूर होगा? क्‍या चार साल बीत जाने पर वो निजी कंपनियों को इकाई खोलने का न्‍योता देंगे?

पानी का संकट

पानी का संकट

किसी अन्‍य शहर की क्‍या बात करें, राजधानी लखनऊ में यह हाल है कि शहर की आधी जनता सुबह 4 बजे उठती है, ताकि समय से पानी मिल सके। जिस दिन 6 बजे सोकर उठे पानी खत्‍म। जी हां यही हाल कानपुर, वाराणसी, आगरा, मुरादाबाद, हरदोई समेत कई शहर ऐसे हैं, जाहं पानी की समस्‍या गंभीर है।

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