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पोंटी चड्ढा हत्‍याकांड: इस जाँच का मैच फिक्स है

Ponty Chadha
लखनऊ। जहाँ पैसा, प्रतिष्ठा, प्रलोभन व प्रभाव का गठजोड़ हो वहां जांच का मैच प्रायः फिक्स होता है। केवल पैसा की ही बात करे तो बाप बड़ा न भैय्या सबसे बड़ा रूपैया। सारे संबंध रूपये के सामने बौने है यहाँ। पानी रे पानी तेरा रंग कैसा जिसमें मिला दो लगे उस जैसा गाने के ये बोल अब ध्यान नही खिंचते बल्कि बोर करते हैं। जनता को सच बताने वाले पत्रकार को जब मान्यता लेनी हो तो वहां एक एलआईयू जांच रिपोर्ट की अनिवार्यता है। पत्रकार भी प्रायः पैसा देकर रिर्पोट लगवाता है। पैसा पुलिस के सिर चढ़ कर बोलता है। ड्राईविंग लाईसेंस, पासपोर्ट, चरित्र प्रमाण पत्र आदि थाने व एलआईयू की जाँच में साक्ष्य की सत्यता तभी है जब देने को पैसा हो। अन्यथा सब साक्ष्य धरे रह जाते हैं। पैसा संबंध बनाता है और पैसा ही रिश्तो को तोड़ता भी है। खुलेआम पुलिस पैसा लेती है। यह बात सड़क पर चलने वाला राहगीर देखता है।

पैसा, प्रतिष्ठा, प्रलोभन, प्रभाव जब मिल जाये तो क्या नही हो सकता यानि झूठ को सच, सच को झूठ बन मनचाहा परिणाम मिलने की गारंटी बन जाता है। माल वाली पार्टी हाथ लग जाए तो कानूनी अड़चनों को और पेचिदा पेश किया जाने लगता है। सीधा माल ही हाथ लग जाए तब सोचो क्या होता है। इसी पैसे, प्रतिष्ठा, प्रलोभन व प्रभाव की गुत्थी में उलझती जा रही है पोंटी चड्ढा व उसके भाई हरदीप की हत्या की कहानी। हत्या के दिन से रोज नया पुलिसिया दावा अखबारों में पढ़ने को मिलता है। दोनों भाईयों के साम्राज्य को कोई बड़ी ठेस न लगे इसीलिए दोनों भाईयों की हत्या के फौरन बाद एम्स अस्पताल में साथ साथ हुआ पोस्टमार्टम में सबसे पहले एकता दिखी। दूसरा एक साथ दोनो भाईयों से दाह संस्कार मे, तीसरी उसके बाद अखबारों में अंतिम अरदास का विज्ञापन भी एकता को दिखाने वाला एक प्रयास है।

जिन सफेदपोशों व नौकरशाह लोगों का पैसा इस देश भर में फैले शराब, जमीन, खनन आदि के साम्राज्य में लगा है दरअसल वो चाहते हैं कि दोनो भाईयों के परिवारों में एक दूसरे की हत्या करने के कारण साम्राज्य न बटें। तभी उनका पैसा लौट सकता है या सुरक्षित लगा रह सकता है। उसी पैसे प्रभाव के कारण पुलिस रोज एक नई कहानी कह रही है। यह बात तो तय हो चुकी है कि हत्याओं का दोष अब सुखदेव सिंह नामधारी के माथे मड़ा जायेगा। यानि सांप भी मर जाये और लाठी भी ना टूटे। कालाबाजारी में शामिल हिन्दुस्तान में ब्लैकमनी के कारोबारियों का गठजोड़ बहुत गहरा है। अभी तो कही दूर-दूर तक इसके टूटने की बात दिखाई नही देती। इस पर आंच भी आती नही दिख रही है।

पुलिस की कहानी उसकी जुबानी

18 नवंबर: पिता कुलवंत सिंह के निधन के कुछ दिन बाद से ही 55 वर्षीय पोंटी चड्ढा का अपने भाई हरदीप के साथ सम्पत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद शुरू हो गया था। महरौली के फार्म हाऊस को लेकर यह विवाद बढ़ गया था। 16 नवंबर दिन शुक्रवार की रात भी दोनो भाईयों मे कहासुनी हुई थी। शनिवार पूर्वाहन पोंटी ने जब अपने लोगों के साथ इस फार्म हाऊस में घुसकर कब्जे की कोशिश की थी तभी अपनी पिस्टल से हरदीप ने उस पर फायरिंग कर दी। पोंटी को गोली लगी देख पंजाब पुलिस के जवानों और उनके निजी सुरक्षाकर्मियों ने हरदीप पर फायरिंग की। गोलाबारी में पोंटी को 11 और हरदीप को 3 गोली लगी। इस दौरान नरेन्द्र नाम का एक सुरक्षा कर्मी भी घायल हो गया। वह खतरे से बाहर है।

पुलिस को मौके से 2 पिस्टल 1 AK47 राइफल और कारतूस के दर्जनों खोके मिले। दोनो पिस्टलों के लाइसेंस हरदीप के नाम पाये गये हैं। पुलिस ने सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लिया है। उल्लेखनीय है कि हत्या के 42 दिन पहले 5 अक्टूबर को पोंटी चड्ढा के मूल आवास मुरादाबाद में भी गोली बारी हुई थी। लेकिन मामले को यह कह कर दबा दिया था कि नए हथियार की टेस्टिंग की जा रही थी। एक कॉल पर दफन हुई गोलियों की गूंज और 5 अक्टूबर को हुई फायरिंग प्रकरण को लखनऊ की एक कॉल पर दफन कर दिया गया था। पोंटी का रसूख परिवार में चली गोली के सही निहितार्थ सामने नही लाए गए और शस्त्र जब्त करने के बाद भी पुलिस को यूटर्न लेना पड़ा था।

19 नवंबर: दिल्ली के छत्तरपुर इलाके में 12 एकड़ के फार्म हाऊस पर दोनों भाईयों का आमना-सामना होते ही फायरिंग हुई। घटना के आधा घण्टे पहले पोंटी के निजी सुरक्षा गार्ड़ व अन्य लोग फार्म हाऊस पर कब्जा कर चुके थे। गोलाबारी के दौरान पोंटी के साथ रहे उनके मित्र उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन सुखदेव सिंह के बयान पर हत्या व हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया। हरदीप के मैनेजर के बयान पर पोंटी के लोगों के खिलाफ घर में जबरन घुसने, डैकेती व अपहरण की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। हाईप्रोफाईल मामला होने के कारण दोनों मुकदमों में पुलिस ने किसी को भी नामजद नही किया। करीब 18 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पोंटी की लैण्डक्रूजर गाड़ी जब्त की गई। उस पर गोलियों के निशान मिले। पुलिस ने बताया कि दोनों भाइयों के बीच खूनी संघर्ष होने के आधे घण्टे पहले पोंटी के 2-3 दर्जन लोग फार्म हाऊस पहुंचे।

उनमें पंजाब पुलिस के निजी सुरक्षा अधिकारी, निजी सुरक्षा गार्ड, व अन्य शामिल थे। फार्म हाऊस पर कब्जा कर लिया गया। फार्म हाऊस में रह रहे हरदीप के आधा दर्जन लोगों की पिटाई करते हुए उनके मोबाइल व अन्य सामान लूटा व फार्म हाऊस से बाहर खदेड़कर कोठी में ताला लगा दिया था। पोंटी, सुखदेव सिंह नामधारी उनके गनर सचिन त्यागी व अपने वाहन चालक के साथ फार्म हाऊस मुआयना करने पहुंचे। पंजाब पुलिस के तीन पीएसो व दो निजी सुरक्षा गार्ड़ दूसरी गाडी में सवार थे जो पिछे रह गए थे। उसी समय हरदीप भी चालक के साथ आ गया। हरदीप ने अकेले ही दोनों पिस्टलो से पोंटी पर गोलियां दागी। सुखदेव व सचिन त्यागी पर भी गोलियां चलानी शुरू की थी। उसी वक्त गनर त्यागी ने कारबाइन से तीन गोलियां चला हरदीप को मौत के घाट उतार दिया।

20 नवंबर- पुलिस ने कहा कि प्रापर्टी विवाद में ही गई पोंटी की जान। तीन मुकदमें दर्ज, दो लोग गिरफ्तार कुछ हिरासत में ।
21 नवंबर- पोंटी हत्या की रिर्पोट लिखवाने वाले नामधारी हिरासत में।
22 नवंबर- दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने दोनो भाईयों की हत्या में तीसरे पक्ष की संलिप्तता से इंकार।
23 नवंबर- पोंटी का नौकर मथुरा सिंह मेहरा गिरफ्तार। उस पर कर्मचारियों व गुण्डों को हथियार मुहैया कराने का आरोप।
24-25-26 व 27 नंबर- नामधारी के इर्द गिर्द घेरा।

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