एक आम नागरिक से खूंखार आतंकवादी बनने तक कसाब का सफर

उसने इस संगठन में प्रशिक्षण लेना प्रारम्भ कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि लश्कर-ए-तैयबा ने उससे वादा किया था कि अगर वह मुंबई हमले में शहीद हो जाता है तो उसके परिवार को डेढ़ लाख रूपये दिये जायेंगे।
कसाब ने मुंबई हमले के इरादे से अपने अन्य आठ साथियों के साथ समुद्री मार्ग से मुंबई में प्रवेश किया। उसके समूह ने ताजमहल होटल, ओबेराय ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस को अपना निशाना बनाया। छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर मासूम लोगों पर गोलीबारी करते समय उसे सीसीटीवी कैमरे में कैद किया गया। कसाब और उसके साथी खान ने महाराष्ट्र आतंकी निरोधक बल के प्रमुख हेमंत करकरे और अन्य लोगों को मारकर पुलिस वाहन पर कब्जा कर लिया और मेट्रो सिनेमा की तरफ बढ़ चला। रास्ते में वाहन पंचर होने पर उन्होने दूसरे वाहन पर कब्जा किया। चौपाटी पुलिस बैरीकेटिंग पर पुलिस से हुई झड़प में उसका साथी खान मारा गया। कसाब ने भी मरने का नाटक किया और जब सहायक उप निरीक्षक तुकाराम ओम्ब्ले उसे मरा मानकर नजदीक आये तो कसाब ने उनपर अंधाधुंध फायरिंग कर दी लेकिन मरते मरते उन्होने कसाब के हथियार को अपने नियंत्रण में ले लिया तब तक अन्य पुलिस कर्मियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
कसाब की गिरफ्तारी के बाद अपील और सुनवाई का एक लम्बा दौर चला और अन्त में राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने पर उसे पुणे की यरवदा जेल में 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गयी। जहां उसने अपनी मौत से पहले अपनी मां को खबर दिये जाने की इच्छा व्यक्त की थी।












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