Exclusive: अंडरग्राउंड हुए बुंदेलखंड के राजनीतिक सूरमा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने तक बुंदेलखंड का कायाकल्प करने का दावा करने वाले राजनीतिक दलों के सूरमा ताबड़ तोड़ दौरा व जनसभा कर यहां के शहर व कस्बा ही नहीं, बल्कि गांवों तक की धूल उड़ा दी थी, मगर सूबे में समाजवादी पार्टी (सपा) की अगुआई में अखिलेश सरकार के गठन के साथ ही अन्य सभी का मोह इस इलाके से भंग हो गया।
कैबिनेट में एक भी बुंदेली नेता नहीं
उन्नीस विधानसभा क्षेत्रों वाले इस अति पिछड़े बुंदेलखंड में सत्ता से बेदखल बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को सात, सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) को पांच, कांग्रेस को चार व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को तीन सीटों पर कामयाबी मिली है। लेकिन, तकरीबन सभी दल बुंदेली मतदाताओं से इस बात पर खफा हैं कि उन्हें उम्मीद से कम तवज्जो दी गई है। सबसे ज्यादा सपा नाराज दिख रही है, तभी तो अपने पांच में से किसी एक भी विधायक को मंत्रि परिषद में जगह नहीं दी।
बसपा के प्रति बुंदेली मतदाताओं की आम धारणा यही रही कि चार बार मुख्यमंत्री बनने पर मायावती कुछ नहीं कर सकीं तो अब क्या करेंगी? किन्तु कांग्रेस के राहुल गांधी के उठो, जागो और बदलो उत्तर प्रदेश के नारे से बुंदेलों को कुछ ज्यादा ही उम्मीद थी, पर हार की खीझ इतनी बढ़ी कि केन्द्र सरकार ने बुंदेलखंड के झांसी में केन्द्रीय कृशि विश्वद्यालय की सदन में घोषणा करने के बाद भी बजट में एक धेला का प्राविधान नहीं किया गया।
राहुल गांधी ने भी पलट कर नहीं देखा
बांदा के नहरी गांव में भागवत प्रजापति की भूख से हुई मौत के बाद उसके कच्चे घरौंदे में ‘चटनी-रोटी' खाकर रात की ‘बसनेर' करने वाले राहुल गांधी इतने गमजदा हुए कि यहां आना दूर की बात, वह दिल्ली में बैठ कर भी मनमोहन सरकार से यहां के पिछड़ेपन की चर्चा तक करना भी मुनासिब नहीं समझा।
वहीं बुंदेलखंड को उत्तर प्रदेश का ‘कश्मीर' बताने वाली मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती महोबा की चरखारी सीट से विधायक तो बन गई, लेकिन भाजपा को उबार पाने में असफल होने पर ऐसा लगता है कि वह राजनीतिक ‘अज्ञातवास' में चली गई हैं। यही हाल अरसे से पृथक बुंदेलखंड के गठन का राग अलापने वाले फिल्म अभिनेता और बुंदेलखंड कांग्रेस के अध्यक्ष राजा बुंदेला का है।
सपा से कोई उम्मीद नहीं
झांसी की सदर विधानसभा सीट के चुनाव में उन्हें मिले मात्र 1897 मत एक बार उनको अपने राजनीतिक फैसले पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर दिया है। हालांकि तमाम कयासों के बीच बबेरू से सपा के विधायक विश्वम्भर सिंह यादव कहते हैं कि ‘प्रदेश की अखिलेश सरकार बुंदेलखंड के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, किसानों की सिंचाई, खाद-बीज की समस्या या पलायन को रोंकने की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं।
महोबा जनपद की चरखारी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता अपनी विधायक और भाजपा की तेज तर्रार नेता उमा भारती से उकता गए हैं। पनवाड़ी कस्बे के व्यापारी उमेश सवाल करते हैं कि हम अपने विधायक (उमा) को कहां ढूढ़ें, मध्य प्रदेश या दिल्ली? अब चुनाव के वक्त वाले मोबाइल भी बंद हैं। इसी कस्बे में हाथ ठेला की आमदनी से गुजर-बसर करने वाले बुजुर्ग लालबुआ का कहना है कि ‘बड़ी उम्मीद के साथ उन्हें (उमा को) जिताया है, अब लगता है कोई भला नहीं होगा। फिल्म अभिनेता और बुंदेलखंड कांग्रेस के संस्थापक अध्यक्श राजा बुंदेला ने कहा कि ‘इस चुनाव में भले ही बुंदेलों ने उन्हें और उनकी पार्टी को नकार दिया है, पर वह पृथक राज्य की मांग को लेकर पूर्व की भांति जन जागरण करते रहेंगे।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा विधायक दल के उपनेता और बांदा की नरैनी सीट विधायक गयाचरण दिनकर का कहना है कि बसपा शासन में बुंदेलखंड को मेडि़कल कालेज, इंजीनियरिंग कालेज व मान्यवर कांशीराम जी कृषि विश्वविद्यालय जैसे कई संस्थानों की सौगात मिली है। सूबे के हर इलाके से ज्यादा यहां का विकास हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी लोगों को गुमराह कर सत्ता में आई है, इस सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। कुल मिला कर यह कहना गलत न होगा कि विधानसभा चुनाव में कई तरह के सब्जबाग दिखाने वाले राजनीतिक सूरमा एक बार फिर बुंदेली धरा को ठग कर इस कदर भूमिगत हुए हैं कि शायद यहां की जनता को इनके लापता होने के इश्तेहार छपवाने पड़ सकते हैं।












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