ओपीनियन पोल- नरेंद्र मोदी ने मनमोहन को मात दी

नई दिल्‍ली। अन्‍ना हजारे, अरविंद केजरीवाल और बाबा रामदेव के तमाम अभियान अब मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री की कुर्सी से धकेलने लगे हैं। जी हां लोगों ने मन बना लिया है कि वो अपना अगला नेता किसी और को चुनेंगे। अगर हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स और सीएनएन-आईबीएन के ओपीनियन पोल की मानें तो नरेंद्र मोदी को अपने नेता के रूप में देखना सबसे ज्‍यादा लोग चाहते हैं।

शीत कालीन सत्र में भारतीय जनता पार्टी अन्‍य दलों के साथ मिलकर एफडीआई पर केंद्र सरकार को घेरने वाली है। उसका नकारात्‍मक प्रभाव जरूर दिखाई देगा लेकिन एक असर जो अभी दिखाई दे रहा है वो है 2014 में यूपीए सरकार का बंटाधार होने का। साथ ही गुजरात विधानसभा चुनाव में एक बार फिर नरेंद्र मोदी की जीत दिखाई दे रही है।

सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी शहरी लोग मानते हैं कि देश पर आर्थिक संकट कभी भी गहरा सकता है, लिहाजा उनकी नौकरी अब सुरक्षित नहीं रही है। वहीं 55 फीसदी लोग मानते हैं कि इस दिशा में केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही है।

नेताओं की बात करें तो 65 फीसदी लोग कहते हैं कि देश के नेताओं के भ्रष्‍ट होने के कारण देश को न तो सही नेतृत्‍व मिल पा रहा है और न ही दिशा। नेताओं की बात करें तो सबसे ज्‍यादा 24 फीसदी वोट नरेंद्र मोदी को मिले हैं। यानी लोगों का विश्‍वास मोदी के साथ बना हुआ है, लेकिन भाजपा पर विश्‍वास अभी फीका है। यही कारण है कि जब सक्षम पार्टी की बात आयी तो कांग्रेस को 32 फीसदी और भाजपा को 28 फीसदी वोट मिले।

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जंग की बात पर 65 फीसदी लोगों ने अन्‍ना हजारे का समर्थन किया। ये लोग मानते हैं कि केजरीवाल जिस रास्‍ते पर जा रहे हैं वो गलत है। केजरीवाल का समर्थन मात्र 12 फीसदी लोगों ने किया। वहीं बाबा रामदेव के पक्ष में मात्र 5 फीसदी लोग हैं।

सवाल और उनके जवाब।

क्‍या आपकी जॉब सुरक्षित है?

क्‍या आपकी जॉब सुरक्षित है?

क्‍या आपकी जॉब सुरक्षित है? इस सवाल के जवाब इस प्रकार मिले-

- सिर्फ 35 फीसदी लोगों ने कहा हां उनकी नौकरी सुरक्षित है।
- 58 फीसदी लोगों ने कहा नहीं नौकरी अब सुरक्षित नहीं।
- 7 फीसदी ने कहा कि वो फिलहाल कुछ नहीं कह सकते।

आपकी जेब पर क्‍या चीज असर कर रही है?

आपकी जेब पर क्‍या चीज असर कर रही है?

- 63 फीसदी लोगां ने कहा बढ़ती महंगाई।
- 23 फीसदी ने कहा पेट्रोल-डीजल के दाम।
- 7 फसीदी ने कहा किराये में बढ़ोत्‍तरी।
- 7 फीसदी ने कहा सोने के दाम में बढ़ोत्‍तरी।

क्‍या सरकार के प्रयासों से संतुष्‍ट हैं?

क्‍या सरकार के प्रयासों से संतुष्‍ट हैं?

- सिर्फ 36 फीसदी लोगों ने सरकार के कार्यों पर संतुष्टि जताई।
- 55 फीसदी लोगों ने कहा कि सरकार के प्रयास बिलकुल नाकाम हैं।
- 9 फीसदी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

क्‍या पीएम अपनी अपने एजेंडे पर खरे उतरे?

क्‍या पीएम अपनी अपने एजेंडे पर खरे उतरे?

- 33 फीसदी ने कहा हां।
- 49 फीसदी ने कहा कतई नहीं।
- 18 फीसदी ने कहा इस पर वो कुछ नहीं कह सकते।

सबसे ज्‍यादा भ्रष्‍टाचार के लिये कौन दोषी?

सबसे ज्‍यादा भ्रष्‍टाचार के लिये कौन दोषी?

- 65 फीसदी ने कहा राजनेता।

- 19 फीसदी ने कहा खुद जनता।

- 9 ने कहा देश के सरकारी अधिकारी व कर्मचारी।

- 3 फीसदी ने कहा बड़े उद्योगपति।

कौन सी पार्टी देश चलाने में सक्षम है?

कौन सी पार्टी देश चलाने में सक्षम है?

- 32 फीसदी ने कहा कांग्रेस।
- 28 प्रतिशत ने कहा भाजपा।
- 4 प्रतिशत ने कहा सपा के साथ ममता का तीसरा मोर्चा।
- 4 प्रतिशत ने कहा कांग्रेस नेतृत्‍व वाली यूपीए।
- 2 फीसदी ने कहा सपा के नेतृत्‍व वाला तीसरा मोर्चा।
-2 फीसदी ने कहा सपा और वामदल।

सर्वश्रेष्‍ठ नेता जो देश को चला सके?

सर्वश्रेष्‍ठ नेता जो देश को चला सके?

- 24 फीसदी ने कहा नरेंद्र मोदी।
- 16 फीसदी ने कहा मनमोहन सिंह।
- 16 फीसदी ने का सोनिया गांधी।
- 13 फीसदी ने कहा राहुल गांधी।
- 5 फीसदी लोग नीतीश कुमार के साथ।
- 2 फीसदी ने कहा मुलायम सिंह यादव।

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ किसी जंग सही?

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ किसी जंग सही?

- 65 फीसदी ने कहा अन्‍ना हजारे।
- 12 फीसदी ने कहा अरविंद केजरीवाल।
- 5 फीसदी ने कहा बाबा रामदेव।

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