आतिशबाजी के धुएं से दिल्‍ली पर छाया स्‍मॉग का साया

Diwali smoke may trigger another smog in Delhi
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। लाख चेतावनी और मनाही के बावजूद भी दीवाली के मौके पर दिल्‍ली के लोगों ने पटाखों और आतिशबाजी का जमकर आनंद उठाया। हालांकि आंकड़ों की मानें तो पिछली दीवाली की तुलना में इस बार आतिशबाजी कम हुई मगर फिर प्रदुषण के लिहाज से ये दिल्‍ली के लिये काफी थी। मौसम विभाग की मानें तो दिल्‍ली स्‍मॉग की चपेट में आ गई है जो दिल्‍लीवालों के सेहत के लिये ठीक नहीं है।

मालूम हो कि दीवाली की शाम से दिल्‍ली में पटाखों की धूंध साफ दिखने लगी और जैसे-जैसे रात गहराती गई धुएं ने दिल्‍ली को अपनी चपेट में इस कदर ले लिया कि थोड़ी दूर देख पाना भी मुमकिन नहीं था। मौसम विभाग और डॉक्‍टरों का कहना है कि पटाखों के धुएं से सेहत पर स्मॉग का खराब प्रभाव पड़ना तय है।

उल्‍लेखनीय है कि दिल्‍ली सरकार ने लोगों से दीवाली पर आतिशबाजी से बचने की अपील की थी लेकिन लोगों ने पर्यावरण और दिल्‍ली पर मंडराते हुए स्‍मॉग के खतरे को नजरअंदाज कर दिया। स्‍मॉग के बारे में आपको बताते चलें कि स्‍मॉग का मतलब धुएं और धुंध का मिलाजुला असर। वो धुंध जो सेहत के लिए नुकसानदायक है। गौरतलब है कि अभी चार दिन पहले ही दिल्‍ली में धुंध को लेकर तेजाबर बारिश की आशंका जाहिर की गई थी। काफी मशक्‍कत के बाद दिल्‍ली इस कहर से बाहर निकल पाई थी कि दीवाली में हुई आतिशबाजी ने उसे फिर वहीं धकेल दिया।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बुधवार को भी दिल्ली और इसके आसपास के आसमान में धुंध छाई रहेगी। ये हालात दो-तीन दिन तक बने रह सकते हैं। पटाखों से निकलने वाला धुआं नमी के कारण पर्यावरण में रुककर धुंध की बजाय स्मॉग को बढ़ा देता है, जो सांस के रोगियों के लिए सबसे खतरनाक है। वहीं दिल के मरीजों के लिए भी पटाखों का धुआं घातक साबित हो सकता है। इस धुएं के कारण सामान्य लोगों को भी फेफड़े में संक्रमण की संभावना दोगुना हो जाती है।

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