स्कूली लड़कियों ने मूत्र से बनाई बिजली

इन छात्राओं ने बिजली बनाने के लिये एक ऐसे पदार्थ का प्रयोग किया है जो मुफ्त, असीमित मात्रा में और आराम से उपलब्ध है। मेकर फेयर ब्लाग के अनुसार, इस नई खोज में मूत्र को एक इलैक्ट्रोलिटिक सेल में डाला जिसने मूत्र को नाइट्रोजन , जल और हाइड्रोन में तब्दील कर दिया। इसके बाद शुद्धिकरण के लिए हाइड्रोन वाटर फिल्टर में गया जिसे आगे गैस सिलेंडर में धकेला गया।
गैस सिलेंडर ने हाइड्रोजन को तरल बोरैक्स के सिलेंडर में भेजा जिसका इस्तेमाल हाइड्रोजन गैस से नमी को अलग करने में किया जाता है। इस शुद्धिकृत हाइड्रोजन गैस को जनरेटर में भेजा गया जहां एक लीटर मूत्र से छह घंटे तक चलने वाली बिजली बनाने में मदद मिली। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह खोज इस इवेंट के सबसे धमाकेदार प्रोडक्ट्स में से एक साबित हो सकती है।
नाइजीरिया की आर्थिक स्थिति इन दिनों सुधार पर है। हालांकि, देश के 162 मिलियन लोगों के लिए बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अगर यह तकनीक विकसित हो पाई, तो वहां के लोगों के वारे न्यारे हो सकते हैं।












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